अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 24 जून 2026
पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी युद्ध और तनाव के बीच अब कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण हलचल दिखाई देने लगी है। अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और लेबनान के बीच एक नई पहल पर चर्चा शुरू हुई है, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था की तैयारी हो रही है।
वॉशिंगटन में चल रही वार्ताओं के दौरान इज़राइल और लेबनान के अधिकारियों के बीच दक्षिणी लेबनान के कुछ विवादित क्षेत्रों को लेकर चर्चा हुई। अमेरिकी समर्थन प्राप्त प्रस्ताव के तहत इज़राइली सेना अपने कब्जे वाले कुछ इलाकों को लेबनानी सेना के हवाले कर सकती है। हालांकि इसके बदले लेबनानी सैनिकों को अमेरिकी प्रशिक्षण और सुरक्षा जांच से गुजरना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका संबंध हिजबुल्लाह से न हो।
सूत्रों के अनुसार यह एक “पायलट प्रोजेक्ट” होगा, जिसकी सफलता के बाद व्यापक सीमा समझौते का रास्ता खुल सकता है। इज़राइल सीमा पर एक सुरक्षा बफर जोन बनाए रखने का पक्षधर है, जबकि लेबनान अपनी संप्रभुता की बहाली चाहता है।
उधर ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बाद एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने संकेत दिया है कि एजेंसी के निरीक्षक जल्द ही ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्रों का दौरा करेंगे।
यह निरीक्षण अमेरिका-ईरान समझौते का अहम हिस्सा माना जा रहा है। समझौते के तहत ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर पर लाना होगा और इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी करेगी। हालांकि पिछले दिनों तेहरान और वॉशिंगटन के बीच इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए थे।
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन में उनकी बैठकों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर सहयोगी देशों की चिंताओं को दूर करना है। कई खाड़ी देशों को आशंका है कि समझौते से ईरान की क्षेत्रीय ताकत और प्रभाव बढ़ सकता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिकी सीनेट ने पहली बार ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाते हुए “वार पॉवर्स रिजोल्यूशन” पारित किया है। हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि अमेरिका के भीतर भी युद्ध और समझौते को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं।
उधर वैश्विक तेल बाजार में राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने हालांकि अभी भी ईरान, इराक और लेबनान के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने भारत पहुंचे हैं। गुरुग्राम में होने वाली इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, तेल आपूर्ति और हरित ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इज़राइल-लेबनान वार्ता और अमेरिका-ईरान समझौता सफल होता है तो यह पूरे पश्चिम एशिया के लिए एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हो सकती है। हालांकि दशकों पुराने अविश्वास, सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को देखते हुए स्थायी शांति की राह अभी भी आसान नहीं दिखाई देती।
फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन, तेहरान और बेरूत पर टिकी हैं, जहां लिए जा रहे फैसले आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की नई भू-राजनीतिक तस्वीर तय कर सकते हैं।




