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वर्केशन और डिजिटल नोमेड लाइफस्टाइल का बढ़ता चलन: गोवा, मनाली और ऋषिकेश बने नई पीढ़ी की कार्यस्थली

गोवा 

1 अगस्त 2025 

कोविड के बाद बदली हुई कार्यशैली ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ को एक नई दिशा दी — अब यह बदलकर ‘वर्क फ्रॉम एनीवेयर’ हो चुका है। खासकर आईटी प्रोफेशनल्स, डिजाइनर्स, राइटर्स और ऑनलाइन मार्केटर्स के बीच एक नया चलन तेज़ी से बढ़ा है — जिसे कहते हैं ‘वर्केशन’ या डिजिटल नोमेड लाइफस्टाइल’।

गोवा, मनाली, ऋषिकेश, औली, और केरला के बैकवॉटर इलाकों में अब हाई-स्पीड इंटरनेट वाले होमस्टे, वर्क कैफे और टेम्पररी को-लिविंग स्पेस खुलने लगे हैं, जहाँ लोग काम और छुट्टियों को एकसाथ जी रहे हैं।

गोवा की पलेलेम बीच पर बने कुछ होटलों और कैफे ने अब बाकायदा ‘वर्क डेस्क बाय द सी’ जैसे ऑफर लॉन्च किए हैं। ये जगहें युवा प्रोफेशनल्स को तनावमुक्त वातावरण में काम करने का मौका देती हैं — जहां सामने समुद्र की लहरें हों और हाथ में लैपटॉप।

एक सर्वे के मुताबिक, 2022 की तुलना में 2025 में ‘वर्केशन बुकिंग्स’ में 38% की वृद्धि देखी गई है। इसमें सबसे ज़्यादा बुकिंग 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के प्रोफेशनल्स की रही है।

इन जगहों पर लोग सिर्फ काम ही नहीं कर रहे, बल्कि सुबह योग, दोपहर में ज़ूम मीटिंग और शाम को बीच वॉक या ट्रेकिंग करते हैं। कई डिजिटल नोमेड अब छोटे-छोटे कस्बों में महीनों तक रहते हैं, लोकल संस्कृति को समझते हैं और काम के साथ ज़िंदगी का आनंद उठाते हैं।

ट्रैवल इंडस्ट्री को इससे नया जीवन मिला है। को-वर्किंग और को-लिविंग स्पेस चलाने वाले स्टार्टअप्स की डिमांड बहुत बढ़ गई है, जो अब विशेष तौर पर डिजिटल नोमेड्स के लिए सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह चलन बड़े शहरों से पलायन को भी बढ़ावा देगा और छोटे शहरों और गांवों में स्मार्ट और टिकाऊ विकास (Smart & Sustainable Development) का आधार बन सकता है।

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