राष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 22 जून 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को दावा किया कि उनका बहुचर्चित “ऑपरेशन टाइगर” सफल हो गया है और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसद अब उनके खेमे में आ चुके हैं।
शिंदे ने कहा, “जो लोग मुझे जानते हैं, वे जानते हैं कि मैं कोई भी ऑपरेशन अधूरा नहीं छोड़ता।” उनके इस बयान को उद्धव ठाकरे की पार्टी में हुई नई टूट की आधिकारिक पुष्टि माना जा रहा है।
उद्धव गुट को बड़ा झटका
सूत्रों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने अलग समूह बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि यह समूह जल्द ही शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से विलय कर सकता है।
हिंगोली के सांसद नरेश पाटिल अष्टीकर और धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा कर दी है। दोनों नेताओं ने अपने फैसले के पीछे विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड न मिलने और पार्टी नेतृत्व के रवैये को जिम्मेदार बताया है।
“18 जून तक कोई फैसला नहीं था”
नरेश पाटिल अष्टीकर ने कहा कि 18 जून तक उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया था, लेकिन पार्टी नेताओं की ओर से लगातार अपमानजनक टिप्पणियों के बाद परिस्थितियां बदल गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व सांसदों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा कर रहा था, जिससे असंतोष बढ़ता गया।
भाजपा नेतृत्व के सहयोग का दावा
शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि इस पूरी राजनीतिक कवायद को सफल बनाने में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का भी सहयोग मिला। सूत्रों के अनुसार अंतिम समय तक कई राजनीतिक और कानूनी अड़चनें सामने आईं, लेकिन उन्हें दूर कर लिया गया।
एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “रास्ते में कई बाधाएं थीं, लेकिन अंततः सभी मुश्किलें पार कर ली गईं और ऑपरेशन सफल रहा।”
महाराष्ट्र की राजनीति में बदलेंगे समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छह सांसदों का यह विलय औपचारिक रूप से पूरा हो जाता है तो लोकसभा में उद्धव ठाकरे की राजनीतिक ताकत को बड़ा झटका लगेगा, जबकि शिंदे गुट और अधिक मजबूत होकर उभरेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राजनीतिक संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
उद्धव ठाकरे के सामने नई चुनौती
2022 में पार्टी विभाजन के बाद यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। पहले बड़ी संख्या में विधायक शिंदे के साथ गए, फिर चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को सौंप दिया। अब सांसदों के संभावित पलायन ने उद्धव गुट के सामने संगठनात्मक अस्तित्व की नई चुनौती खड़ी कर दी है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह केवल छह सांसदों का मामला नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र में शिवसेना की विरासत, नेतृत्व और भविष्य की लड़ाई का नया अध्याय है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि “ऑपरेशन टाइगर” राज्य की राजनीति का निर्णायक मोड़ साबित होता है या फिर एक नए राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत।




