राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अगस्त 2026
देश की सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने बड़ा फैसला लिया है। अब अंतरराष्ट्रीय सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे में कोई भी सौर, पवन या हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना स्थापित नहीं की जा सकेगी। इसके साथ ही सीमा से 50 किलोमीटर तक लगने वाली ऐसी सभी परियोजनाओं के लिए गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।
गृह मंत्रालय ने यह निर्णय सीमावर्ती इलाकों में सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के बढ़ते प्रस्तावों को देखते हुए लिया है। नई गाइडलाइन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए देश की सुरक्षा या संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी पर किसी तरह का खतरा पैदा न हो।
नई सुरक्षा गाइडलाइन के तहत पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के इंजीनियरों, कर्मचारियों, श्रमिकों या अन्य स्टाफ को ऐसी परियोजनाओं में बिना गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा परियोजना से जुड़ी भूमि को किसी विदेशी कंपनी को हस्तांतरित करने से पहले भी केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
गृह मंत्रालय का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित बड़े ऊर्जा संयंत्रों में आधुनिक निगरानी प्रणाली, संचार उपकरण और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा होता है। ऐसे में इन परियोजनाओं का उपयोग जासूसी, संवेदनशील सूचनाओं के संग्रह या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम पैदा करने के लिए न हो, इसलिए सुरक्षा मानकों को और सख्त किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत तेजी से हरित ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है और कई सीमावर्ती राज्यों में बड़े सौर तथा पवन ऊर्जा पार्क प्रस्तावित हैं। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को संतुलित रखना भी जरूरी है। नई गाइडलाइन इसी दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम मानी जा रही है।
इन निर्देशों के बाद अब सीमावर्ती क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए डेवलपर्स को पहले से अधिक कड़ी सुरक्षा जांच और मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।




