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फिर डर गई सरकार! जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन की ‘मैन्युफैक्चर्ड’ भीड़ पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्राओं की पोल खोल वीडियो हटाई गई

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 अप्रैल 2026

ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी में एक बार फिर विवादों का तूफान खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 मार्च 2026 को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के पहले फेज के उद्घाटन समारोह के दौरान यूनिवर्सिटी के छात्रों को बसों में भरकर कार्यक्रम स्थल पर ले जाया गया था। छात्रों को दो दिन की एक्स्ट्रा अटेंडेंस और फ्री खाने-पीने का लालच देकर इस इवेंट में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। एक छात्रा ने sarcastic व्लॉग बनाकर पूरी हकीकत सामने रख दी – लंबा इंतजार, धूप में खड़े रहना, खाने-पानी की कमी, नेटवर्क की समस्या और सबसे बड़ा सवाल कि भीड़ खुद नहीं आई थी बल्कि लाई गई थी। लेकिन जैसे ही यह वीडियो वायरल होने लगा, उसे इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके दबाव या कानूनी नोटिस पर यह वीडियो गायब कर दी गई?

यह मामला सिर्फ एक वीडियो हटने तक सीमित नहीं है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के व्हाट्सएप ग्रुप्स में सर्कुलेट किए गए मैसेज में साफ-साफ लिखा था कि छात्रों को सुबह 7:45 बजे कैंपस पहुंचना है और कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य है। जिन छात्रों ने काला कपड़ा पहनकर पहुंचा, उन्हें एंट्री नहीं दी गई और उन्हें बाहर धूप में खड़ा रहना पड़ा। छात्रों का कहना है कि पढ़ाई छोड़कर उन्हें राजनीतिक इवेंट की भीड़ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया। कुछ छात्रों ने खुलकर बताया कि यह मजबूरी थी, वरना अटेंडेंस और सर्टिफिकेट का वादा पूरा नहीं होता। वीडियो में छात्रा ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा कि “भीड़ खुद नहीं आई, बुलाई गई थी” और यह बात सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। लेकिन कुछ घंटों के अंदर वीडियो हटाने की खबर आने लगी और कई यूजर्स ने इसे “सच दबाने की कोशिश” बताया।

इस घटना ने पूरे NCR में चर्चा का विषय बना दिया है। एक तरफ सरकार जेवर एयरपोर्ट को NCR का नया गेटवे और विकास का प्रतीक बता रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की शिकायतें सामने आ रही हैं कि शिक्षा संस्थान राजनीतिक कार्यक्रमों में छात्रों को टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अटेंडेंस के नाम पर छात्रों को जबरन रैलियों में भेजना गलत है। सोशल मीडिया पर हजारों कमेंट्स आ रहे हैं जिसमें लोग पूछ रहे हैं कि अगर भीड़ इतनी स्वाभाविक थी तो वीडियो क्यों हटाई गई? क्या बड़े आयोजनों में भीड़ जुटाने के लिए अब कॉलेजों को इस्तेमाल किया जा रहा है? यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, जबकि छात्रों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

यह पूरा प्रकरण शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक इवेंट्स के बीच की सीमा को लेकर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। क्या छात्रों की पढ़ाई और समय का सम्मान किया जाना चाहिए या उन्हें हर बड़े इवेंट में भीड़ का हिस्सा बनाया जाना चाहिए? जेवर एयरपोर्ट जैसे मेगा प्रोजेक्ट की चमकदार तस्वीर चमकाने के लिए अगर स्थानीय छात्रों को मजबूरी में लाया जाता है तो यह विकास का असली चेहरा कितना सुंदर है? वीडियो हटाने से विवाद और बढ़ गया है क्योंकि कई लोगों ने उसे पहले ही सेव कर लिया था और अब वह अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर फिर से वायरल हो रहा है।

लोग अब इंतजार कर रहे हैं कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी, आयोजक और प्रशासन इस मामले पर क्या सफाई देते हैं। क्या छात्रों की शिकायतों पर कोई जांच होगी या फिर इसे दबाने की कोशिश जारी रहेगी? जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन की इस पोल खुलने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और छात्रों की आवाज अब आसानी से दबाई नहीं जा सकती।

आप क्या सोचते हैं? क्या कॉलेजों को छात्रों को ऐसे इवेंट्स में मजबूर करना सही है? या यह सिर्फ विकास का हिस्सा है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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