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दक्षिण चीन सागर में तनाव, विवादित स्कारबोरो शोल पर चीन की गतिविधियों पर अमेरिका की पैनी नजर

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/बीजिंग/मनीला | 12 जून 2026

दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की खुफिया एजेंसियां और सैन्य रणनीतिकार फिलीपींस के निकट स्थित विवादित स्कारबोरो शोल क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि चीन यहां स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन प्रभावित हो सकता है और अमेरिका-फिलीपींस रक्षा सहयोग की भी बड़ी परीक्षा हो सकती है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चीन ने स्कारबोरो शोल के भीतर एक तैरता हुआ ढांचा स्थापित किया है, जिसे बीजिंग “वैज्ञानिक अनुसंधान संरचना” बता रहा है। हालांकि फिलीपींस ने इसे अपनी समुद्री सीमा के भीतर चीन की अवैध घुसपैठ करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। फिलीपींस के वेस्ट फिलीपीन सी टास्क फोर्स ने दावा किया है कि यह लगभग 6×6 मीटर का प्लेटफॉर्म है, जिस पर एंटीना जैसी संरचना भी दिखाई दे रही है और वहां कर्मियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।

स्कारबोरो शोल फिलीपींस के लुजोन द्वीप से करीब 140 मील दूर स्थित एक रणनीतिक समुद्री क्षेत्र है। हालांकि यह फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर आता है, लेकिन चीन 2012 से इस क्षेत्र पर वास्तविक नियंत्रण बनाए हुए है। इसी कारण यह इलाका लंबे समय से एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री विवादों में शामिल रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चीन की यह गतिविधि उसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है जिसके तहत उसने पिछले एक दशक में दक्षिण चीन सागर के कई छोटे द्वीपों और चट्टानों को कृत्रिम सैन्य ठिकानों में बदल दिया था। उन ठिकानों पर एयरस्ट्रिप, मिसाइल सिस्टम, रडार स्टेशन और नौसैनिक सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्कारबोरो शोल में भी इसी प्रकार की गतिविधियां आगे बढ़ती हैं, तो क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

दूसरी ओर चीन ने फिलीपींस और अमेरिका की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। चीन के दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि हुआंगयान दाओ (स्कारबोरो शोल का चीनी नाम) चीन का अभिन्न हिस्सा है और वहां वैज्ञानिक अनुसंधान सहित सभी गतिविधियां उसकी संप्रभुता के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। चीन ने अमेरिका पर भी क्षेत्र में तनाव बढ़ाने और टकराव को उकसाने का आरोप लगाया है।

फिलीपींस ने इस मामले में औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया है और कहा है कि वह इस ढांचे के उद्देश्य, प्रकृति और संभावित सुरक्षा प्रभावों का अध्ययन कर रहा है। वहीं अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह अपने संधि सहयोगी फिलीपींस की सुरक्षा और समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

दक्षिण चीन सागर में चीन की यह नई पहल आने वाले समय में अमेरिका, चीन और फिलीपींस के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है। ऐसे समय में जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है, स्कारबोरो शोल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति का बड़ा फ्लैशपॉइंट बनता दिखाई दे रहा है।

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