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टेम्पो से टेकऑफ: उन्नाव की गलियों से आसमान तक, सपने हालात के मोहताज नहीं होते

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एबीसी डेस्क 5 जनवरी 2026

कहानी आज के श्रवण कुमार की

कई बार ज़िंदगी ऐसी कहानियाँ लिख देती है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले से निकलकर देश की एविएशन इंडस्ट्री में कदम रखने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा की कहानी सिर्फ प्रेरक नहीं, पूरी तरह ज़मीनी सच्चाई से निकली हुई है। टाइम्स ऑफ इंडिया और पीटीआई से सामने आई जानकारी के मुताबिक, शंख एयरलाइंस (Shankh Airlines) जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े में उड़ान भरने जा रही है। इस एयरलाइन के चेयरमैन वही शख़्स हैं, जिन्होंने कभी रोज़ी-रोटी के लिए टेम्पो और ऑटो चलाया था। जिन हालात में ज़्यादातर लोग बड़े सपने देखना छोड़ देते हैं, वहीं से श्रवण विश्वकर्मा ने आगे बढ़ने का हौसला जुटाया।

श्रवण कुमार विश्वकर्मा का बचपन और युवावस्था किसी खास सुविधाओं में नहीं बीती। पढ़ाई में मन नहीं लगता था, इसलिए औपचारिक शिक्षा सीमित रह गई। खुद उनके शब्दों में, उस माहौल में “सिर्फ कमाना ही काफी माना जाता था, बड़े सपने देखना लगभग नामुमकिन लगता था।” उन्होंने दोस्तों के साथ ऑटो चलाया, छोटे-मोटे काम किए और कई छोटे कारोबार आज़माए, जो नाकाम भी हुए। लेकिन 2014 के बाद उनकी कारोबारी यात्रा ने रफ्तार पकड़ी। पहले सीमेंट ट्रेड, फिर TMT स्टील, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा। यह सफ़र धीरे-धीरे आगे बढ़ा, बिना किसी बड़े प्लान या शोर-शराबे के। आज उनकी कंपनी के पास 400 से ज़्यादा ट्रकों का बेड़ा है, जो देशभर में काम कर रहा है—एक ऐसा नेटवर्क, जो मेहनत और धैर्य से खड़ा किया गया है।

इसी कारोबारी अनुभव के बीच करीब चार साल पहले उनके मन में एविएशन सेक्टर में उतरने का विचार आया। खुद श्रवण विश्वकर्मा बताते हैं कि जब यह ख्याल आया, तो उन्होंने सबसे पहले नियम-कायदों को समझना शुरू किया—NOC कैसे मिलता है, सिस्टम कैसे काम करता है, और एविएशन इंडस्ट्री की बारीकियां क्या हैं। जो सोच चार साल पहले एक विचार भर थी, वह आज शंख एयरलाइंस के रूप में हकीकत बन चुकी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से NOC मिल चुका है और अब DGCA की अंतिम मंजूरी का इंतज़ार है।

पीटीआई से बातचीत में श्रवण विश्वकर्मा ने बताया कि शंख एयरलाइंस की शुरुआत तीन एयरबस विमानों से होगी। शुरुआती चरण में लखनऊ को दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े महानगरों से जोड़ा जाएगा, साथ ही उत्तर प्रदेश के भीतर भी उड़ानें शुरू की जाएंगी। अगले डेढ़ महीने में दो और विमान बेड़े में शामिल होने की योजना है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे फ्लीट बढ़ेगा, एयरलाइन पूरे देश को कवर करेगी। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की योजना 2028 या 2029 के लिए रखी गई है।

शंख एयरलाइंस की सबसे खास बात इसकी सोच है। श्रवण विश्वकर्मा साफ़ तौर पर कहते हैं कि उनकी एयरलाइन का मकसद हवाई सफ़र को मिडिल क्लास और पहली बार उड़ान भरने वाले यात्रियों के लिए आसान बनाना है। उनके शब्दों में, “हवाई जहाज़ बस एक ट्रांसपोर्ट का ज़रिया है—बस या टेम्पो जैसा। इसे लग्ज़री नहीं समझा जाना चाहिए।” इसी सोच के तहत उन्होंने यह भी साफ़ किया है कि त्योहारों के दौरान टिकट के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे, हालांकि बिज़नेस क्लास के किराए बाज़ार के हिसाब से होंगे। उनका मानना है कि एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत उसका कैश-फ्लो मॉडल है, जहां क्रेडिट सिस्टम नहीं होता और यही इसे स्थिर बनाता है।

एयरलाइन के नाम के पीछे भी एक निजी और सांस्कृतिक जुड़ाव है। श्रवण विश्वकर्मा बताते हैं कि उनकी ट्रेडिंग फर्म पहले से ही “शंख” नाम से चल रही थी और इस शब्द का सांस्कृतिक महत्व भी है, इसलिए एयरलाइन का नाम शंख रखा गया। फंडिंग को लेकर उन्होंने कहा है कि पैरेंट कंपनी का पूरा समर्थन है, विमान लीज़ और फाइनेंस के ज़रिए लिए गए हैं और किसी तरह की पूंजी की कमी नहीं है। प्रतिस्पर्धा को लेकर भी उनका रवैया साफ़ है—“हमें इस बात की चिंता नहीं कि कौन कितना मार्केट शेयर कंट्रोल कर रहा है, हमारा फोकस खुद को बेहतर बनाने पर है।”

युवाओं को संदेश देते हुए श्रवण कुमार विश्वकर्मा की बात सीधे दिल को छूती है। वे कहते हैं, “सबसे पहले यह सोचना छोड़ दीजिए कि लोग क्या कहेंगे। अगर टेम्पो चलाने वाला आदमी एयरलाइन चला सकता है, तो कोई भी आगे बढ़ सकता है। फर्क सिर्फ सोच का है।” उनकी यह कहानी सिर्फ एक कारोबारी सफलता नहीं, बल्कि उन लाखों आम लोगों के लिए उम्मीद है, जो आज भी हालात से जूझते हुए अपने सपनों को दबा देते हैं। शंख एयरलाइंस की यह उड़ान दरअसल एक संदेश है—कि ज़मीन से आसमान तक का सफ़र मुमकिन है, बशर्ते हौसला उड़ान भरने का हो।

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