राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राहत तो दी, लेकिन अदालत का रुख बेहद सख्त रहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राजपाल यादव को ₹2 करोड़ जमा करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया कि यह कोई सामान्य राहत नहीं है, बल्कि आखिरी मौका है। अदालत ने उनके पुराने आचरण को देखते हुए यहां तक सवाल किया कि “कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है?”
8 सितंबर के आदेश का पालन नहीं हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 8 सितंबर को राजपाल यादव को आत्मसमर्पण करने से अस्थायी राहत दी थी। लेकिन यह राहत एक स्पष्ट शर्त के साथ थी कि उन्हें 24 घंटे के भीतर ₹2 करोड़ जमा करने होंगे। जब यह रकम तय समय में जमा नहीं हुई, तो राजपाल यादव ने अदालत से और समय मांगा। मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने दो सप्ताह की मोहलत तो दे दी, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब इसके बाद कोई और अवसर मिलना आसान नहीं होगा।
5 अक्टूबर तक मिली राहत, लेकिन आखिरी मौका
अदालत ने अपने पहले के आदेश को बढ़ाते हुए राजपाल यादव को 5 अक्टूबर तक आत्मसमर्पण से छूट दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि मामला खत्म हो गया या सजा टल गई है। अदालत ने केवल रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। पीठ ने साफ कहा कि यह “आखिरी अवसर” है और अब राजपाल यादव को अपने वादे को वास्तविक कार्रवाई में बदलना होगा।
पूरा मामला 2010 की फिल्म से जुड़ा है
यह कानूनी विवाद वर्ष 2010 में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट्स के अनुसार, राजपाल यादव ने फिल्म बनाने के लिए ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था और इसे बढ़ी हुई रकम के साथ वापस करने की प्रतिबद्धता जताई थी। बाद में भुगतान को लेकर विवाद हुआ और चेक बाउंस के मामले सामने आए।
शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि मूल कर्ज की रकम ब्याज के बिना ₹7.5 करोड़ तक पहुंच चुकी है। हालांकि यह शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में रखी गई दलील है और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
हाईकोर्ट पहले ही सुना चुका है तीन महीने की सजा
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को राजपाल यादव और उनकी पत्नी को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने यह फैसला उस समय लिया जब राजपाल यादव को कर्ज की रकम लौटाने और अपने वादे को पूरा करने के लिए पहले भी कई अवसर दिए जा चुके थे।
इससे पहले मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने भी उन्हें सजा सुनाई थी। राजपाल यादव ने बाद में प्रोबेशन के आधार पर राहत की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
अदालत ने कहा—मौके पहले भी मिल चुके हैं
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी है कि अदालतों की ओर से राजपाल यादव को पहले कई अवसर दिए जा चुके हैं। अदालत ने उनके पुराने आचरण का उल्लेख करते हुए यह सवाल उठाया कि जब पहले किए गए वादों को पूरा करने में परेशानी हुई है, तो अब अदालत किस आधार पर भरोसा करे?
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बार राहत देते हुए भी बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि दो सप्ताह की यह मोहलत आखिरी अवसर के तौर पर दी जा रही है।
राजपाल यादव के वकील ने बताई आर्थिक परेशानी
राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने अदालत को बताया कि अभिनेता गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रकम की व्यवस्था करने के लिए राजपाल यादव को थोड़ा समय चाहिए और इसी वजह से दो सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत मांगी गई।
वकील ने अदालत को बताया कि राजपाल यादव की मां के पास कुछ अचल संपत्ति है और उसका इस्तेमाल रकम जुटाने के लिए किया जा सकता है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए समय दिया, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि अब यह आखिरी अवसर माना जाएगा।
‘बॉलीवुड में अभिनय चलता है, अदालत में नहीं’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की बॉलीवुड पहचान का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि उनकी अभिनय क्षमता से पूरा बॉलीवुड परिचित है, लेकिन अदालत के सामने ऐसा कोई “ड्रामा” नहीं होना चाहिए जैसा वह फिल्मों में करने के लिए जाने जाते हैं।
यह टिप्पणी अदालत की उस नाराजगी को दिखाती है जिसमें वह बार-बार किए गए वादों और उनके पालन के बीच अंतर को लेकर चिंतित दिखाई दी।
शिकायतकर्ता ने कहा—पैसे की कोशिशें नाकाम रहीं
मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत को बताया कि रकम हासिल करने की कई कोशिशें असफल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस अचल संपत्ति का हवाला राजपाल यादव की ओर से रकम जुटाने के लिए दिया जा रहा है, वह पहले से ही बंधक है।
इस दलील के बाद अदालत के सामने यह सवाल भी रहा कि आखिर ₹2 करोड़ की व्यवस्था वास्तव में किस तरह और कितने समय में की जा सकती है।
अब तक ₹2.25 करोड़ का भुगतान
अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने मुकदमे की कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को ₹2.25 करोड़ का भुगतान किया है। यानी भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह रुकी हुई नहीं रही है, लेकिन विवाद में शामिल पूरी रकम को लेकर अब भी कानूनी लड़ाई जारी है।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब अगली राहत का आधार केवल आश्वासन नहीं बल्कि वास्तविक भुगतान और आदेश का पालन होगा।
चार महीने से ज्यादा जेल में रह चुके हैं
राजपाल यादव के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि अभिनेता पहले चार महीने से ज्यादा समय जेल में रह चुके हैं और बाद में उनकी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने मिलकर उन्हें जमानत दिलाई थी। वकील ने अदालत के सामने यह तर्क भी रखा कि अगर राजपाल यादव को दोबारा जेल भेज दिया जाता है तो शिकायतकर्ता को भी रकम मिलने में और देरी हो सकती है।
लेकिन अदालत ने इस बार साफ संकेत दिया कि कानूनी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चीज अदालत के आदेश का पालन है।
अब दो सप्ताह में करना होगा ₹2 करोड़ का इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट ने समय तो दे दिया है, लेकिन अब राजपाल यादव के सामने स्पष्ट समयसीमा है। उन्हें दो सप्ताह के भीतर ₹2 करोड़ जमा करने होंगे। इसके बाद 5 अक्टूबर तक मिली आत्मसमर्पण से छूट समाप्त हो जाएगी और अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो आगे की कानूनी प्रक्रिया उनके खिलाफ जा सकती है।
अदालत का संदेश बिल्कुल साफ
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का संदेश बेहद स्पष्ट दिखाई देता है—अदालत की राहत भरोसे और वादे के आधार पर मिल सकती है, लेकिन उस भरोसे को कायम रखने के लिए आदेश का पालन करना जरूरी है। राजपाल यादव को एक और अवसर मिला है, लेकिन अदालत ने इसे आखिरी मौका बताया है।
अब सवाल सिर्फ ₹2 करोड़ जमा करने का नहीं है। सवाल यह है कि क्या राजपाल यादव इस बार अदालत को दिए गए भरोसे को निभा पाएंगे? क्या दो सप्ताह के भीतर रकम जमा हो जाएगी? और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 5 अक्टूबर के बाद उनके सामने जेल और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता कितना कठिन होगा?



