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उत्तराखंड में वोट चोरी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, चुनाव आयोग पर दो लाख का जुर्माना : कांग्रेस

देहरादून / नई दिल्ली, 27 सितम्बर 2025। 

उत्तराखंड पंचायत चुनावों में कथित वोट चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य चुनाव आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला उस याचिका पर आया जिसमें कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जानबूझकर मतदाता सूचियों में हेरफेर किया ताकि पंचायत चुनावों में अनुचित लाभ लिया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद उन उम्मीदवारों के नॉमिनेशन रद्द नहीं किए जिनके नाम दो या उससे ज्यादा वोटर लिस्टों में दर्ज थे। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि Uttarakhand Panchayati Raj Act, 2016 की धारा 9(6) और 9(7) के मुताबिक, दोहरी वोटर पहचान वाले उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया जाए। लेकिन चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे चुनावी प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ मानते हुए चुनाव आयोग पर पेनल्टी लगा दी।

कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा खेल जनवरी 2025 के शहरी निकाय चुनावों के दौरान शुरू हुआ था। कांग्रेस के अनुसार, बीजेपी ने अपने समर्थकों को गांव की वोटर लिस्ट से हटाकर शहर की लिस्ट में डलवाया ताकि म्युनिसिपल चुनावों में फर्जी वोटिंग के जरिए जीत सुनिश्चित की जा सके। चुनाव खत्म होने के बाद, उन्हीं मतदाताओं को फिर से गांव की वोटर लिस्ट में शिफ्ट करने की कोशिश की गई ताकि पंचायत चुनावों में भी फायदा लिया जा सके।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने कई बार राज्य चुनाव आयोग को लिखा और यह याद दिलाया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए कम से कम छह महीने तक उसी पते पर निवास आवश्यक है। माहरा का कहना है कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने इस नियम को तोड़ते हुए दूसरी जगह अपना नाम फिर से जोड़वा लिया, जिससे वे दो जगह के वोटर बन गए। कांग्रेस के विरोध के बावजूद आयोग ने इन लोगों के नॉमिनेशन रद्द करने से इनकार कर दिया।

कांग्रेस नेताओं ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला साबित करता है कि बीजेपी ने सुनियोजित तरीके से वोट चोरी की साजिश रची और चुनाव आयोग ने नियमों का पालन न करके इसमें अप्रत्यक्ष मदद की। कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने कहा, “यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं है, यह उत्तराखंड के हर ईमानदार मतदाता की जीत है। अब बीजेपी को जवाब देना होगा कि आखिर उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को दो-दो जगह वोटर कैसे बनाया।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस अब इस फैसले को हथियार बनाकर बीजेपी पर चुनावी नैतिकता और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप और तेज़ कर सकती है।

 

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