राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अलीगढ़ | 4 अक्टूबर 2026
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब विश्वविद्यालय परिसर के भीतर तनाव का नया रूप ले चुका है। शनिवार शाम प्रदर्शनकारी छात्रों ने कैंपस के सभी चार प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। हालांकि रविवार सुबह विश्वविद्यालय की सुरक्षा टीम ने सभी गेट दोबारा खोल दिए, लेकिन छात्र आंदोलन की आग ठंडी नहीं हुई है। विवाद उस समय और गहरा गया जब छात्रों के बीच यह खबर पहुंची कि पुलिस ने एमएम हॉल के एक हॉस्टल से चार छात्रों को हिरासत में लिया है। इसी के बाद प्रदर्शनकारी कथित तौर पर प्रॉक्टर कार्यालय की ओर बढ़े और वहां प्रवेश करने की कोशिश की। विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी के सवाल को केंद्र में ला दिया है।
छात्रसंघ चुनाव की मांग पर अड़े छात्र
AMU में छात्रों का आंदोलन मूल रूप से छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की मांग को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र चाहते हैं कि विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व की लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो और छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिले। आंदोलन के बीच शनिवार शाम हालात उस समय बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के चारों प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया। इससे कैंपस में आने-जाने की व्यवस्था प्रभावित हुई और प्रशासन पर दबाव बढ़ गया। हालांकि रविवार सुबह विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों ने गेट खुलवा दिए, लेकिन इससे छात्रों की नाराजगी खत्म नहीं हुई। छात्रों के बीच कार्रवाई और हिरासत की खबरों ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया।
हॉस्टल से हिरासत की खबर ने बढ़ाया तनाव
शनिवार शाम छात्रों के बीच यह खबर तेजी से फैली कि पुलिस ने एमएम हॉल के हॉस्टल से चार छात्रों को हिरासत में लिया है। इसी सूचना के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रॉक्टर कार्यालय की तरफ जाने की कोशिश की। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि हॉस्टल से एक ‘बाहरी व्यक्ति’ को हिरासत में लिया गया है। यही वह बिंदु है जहां छात्रों और प्रशासन के दावों के बीच सवाल खड़े होते हैं। छात्रों की ओर से कार्रवाई को लेकर नाराजगी है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था और परिसर की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हिरासत में लिए गए लोगों की वास्तविक स्थिति क्या है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा पुलिस ने छात्रों को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी।
गेट बंद, फिर खुले—लेकिन विवाद कायम
विश्वविद्यालय के चारों गेटों का बंद होना महज प्रशासनिक परेशानी का मामला नहीं है। यह उस बढ़ते असंतोष का संकेत है जो लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव की मांग के साथ सामने आ रहा है। जब छात्रों ने प्रवेश द्वार बंद किए तो कैंपस की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। बाद में सुरक्षा कर्मियों ने गेट खोल दिए, लेकिन आंदोलन का मूल मुद्दा वहीं बना रहा—छात्रों को चुनाव चाहिए। प्रशासन के सामने अब चुनौती केवल गेट खुलवाने की नहीं बल्कि छात्रों के साथ संवाद कायम करने की भी है। यदि चुनाव की मांग पर बातचीत नहीं होती और कार्रवाई तथा हिरासत की घटनाएं बढ़ती हैं, तो आंदोलन और व्यापक होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
छात्र राजनीति का सवाल फिर केंद्र में
AMU जैसे ऐतिहासिक केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा केवल एक विश्वविद्यालय की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। छात्रसंघ चुनाव छात्रों को अपनी आवाज उठाने, प्रतिनिधि चुनने और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सामूहिक रूप से अपनी मांग रखने का लोकतांत्रिक मंच प्रदान करते हैं। इसलिए चुनाव की मांग को लेकर होने वाला आंदोलन विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक संस्कृति से भी जुड़ जाता है। यही वजह है कि मौजूदा विवाद में छात्रों की मांग, प्रशासन की भूमिका और पुलिस कार्रवाई—तीनों पर सवाल उठ रहे हैं।
शनिवार की घटनाओं ने इस टकराव को और तीखा कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि उनके आंदोलन को लेकर प्रशासन का रवैया सख्त है, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता परिसर में व्यवस्था बनाए रखना है। लेकिन ऐसे माहौल में सबसे ज्यादा जरूरत पारदर्शिता की होती है। किसे हिरासत में लिया गया, क्यों लिया गया, क्या उसके खिलाफ कोई मामला है और छात्रों की मांग पर प्रशासन की आगे की योजना क्या है—इन सवालों के स्पष्ट जवाब जरूरी हैं।
आंदोलन की अगली दिशा पर निगाह
रविवार सुबह चारों गेट खुल जाने के बावजूद AMU का विवाद खत्म नहीं हुआ है। छात्रसंघ चुनाव की मांग अभी भी कायम है और शनिवार की घटनाओं ने छात्रों के असंतोष को और उभार दिया है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने दो रास्ते दिखाई देते हैं—एक, आंदोलन को केवल सुरक्षा और अनुशासन के नजरिए से देखना; दूसरा, छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेकर संवाद का रास्ता खोलना।
कैंपस में तनाव को लंबे समय तक दबाकर रखना किसी भी पक्ष के लिए समाधान नहीं होगा। अगर छात्रों की लोकतांत्रिक मांग पर बातचीत होती है, तो विवाद शांत हो सकता है; लेकिन अगर हर विरोध का जवाब केवल प्रशासनिक कार्रवाई से दिया जाता है, तो टकराव बढ़ने का खतरा बना रहेगा। फिलहाल रविवार को गेट खुल चुके हैं, लेकिन AMU में असली सवाल अभी भी बंद नहीं हुआ—छात्रसंघ चुनाव आखिर कब होंगे?


