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शर्मनाक… दिल्ली दम तोड़ रही है… और PM कह रहे हैं—मौसम का मज़ा लें! — प्रियंका गांधी का सीधा हमला

अवधेश कुमार । नई दिल्ली 1 दिसंबर 2025

दिल्ली की गंभीर प्रदूषण स्थिति, संसद में बढ़ते गतिरोध और SIR विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब राजधानी के लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, तब प्रधानमंत्री का “मौसम का मज़ा लीजिए” कहना सिर्फ असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि जनता के दुख-दर्द का मज़ाक उड़ाने जैसा है। प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री खुद एक बार बाहर झांककर देखें कि दिल्ली किस हालात से गुजर रही है—आसमान में धुंध की मोटी चादर, स्कूलों में मास्क पहने बच्चे, अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की भीड़, और घरों के भीतर तक घुसती हुई जहरीली हवा। इस पर भी प्रधानमंत्री हल्के-फुल्के जुमलों में बात कर रहे हैं जैसे यह कोई मनोरंजन का विषय हो। यह काफी शर्मनाक है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि देश ऐसे नेता से जवाब चाहता है जो समस्याओं को गंभीरता से ले, न कि भाषणों में मजाकिया लाइनें मारकर संकट को छिपाने की कोशिश करे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार को न लोगों की सेहत की चिंता है, न किसानों की, न युवाओं की, न लोकतंत्र की। संसद चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, लेकिन यहां स्थिति यह है कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार ही नहीं है। यह पहली सरकार है जो जनता की समस्याओं से भागती है, विपक्ष की मांगों से भागती है और संवैधानिक जवाबदेही से भी भागती है।

उन्होंने कहा कि SIR पर चर्चा से सरकार क्यों डर रही है? क्या इसलिए कि देश भर में BLO की मौतें हो रही हैं? क्या इसलिए कि चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं? अगर SIR पर बात नहीं करनी तो कम से कम चुनाव सुधारों पर ही चर्चा हो जाए, लेकिन सरकार को तो किसी भी मुद्दे पर बात करने की फुर्सत नहीं है—न किसानों पर, न बेरोज़गारी पर, न महंगाई पर, न शिक्षा और स्वास्थ्य पर।

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प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री पर ताबड़तोड़ प्रहार करते हुए कहा कि “जब देश संकट में होता है, तब प्रधानमंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए—जुमलों का सहारा नहीं।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का रवैया साफ दिखा रहा है कि वह बहस, सहमति, लोकतांत्रिक संवाद और जवाबदेही—चारों से दूर भाग रही है।

सांसद प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि मोदी सरकार संसद को चलाना ही नहीं चाहती, क्योंकि जैसे ही चर्चा शुरू होगी, सरकार से सवाल पूछे जाएंगे—और सरकार के पास किसी सवाल का कोई जवाब नहीं है। न प्रदूषण पर कोई ठोस योजना, न चुनावी सुधारों पर कोई दिशा, न SIR जैसे गंभीर मामलों पर पारदर्शिता।

उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में संसद को बंद कर देने, बहस से भागने और जनता के मुद्दों पर चुप्पी से बड़ी कोई गैरजिम्मेदारी नहीं हो सकती। प्रियंका गांधी के इस बयान ने सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार की जवाबदेही को लेकर दबाव और बढ़ा दिया है।

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