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“बेटी बचाओ का नारा, VIP बचाओ का काम”—अलका लांबा का BJP पर सीधा हमला

सुमन कुमार | नई दिल्ली 6 जनवरी 2026

महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा के शब्द अब सिर्फ बयान नहीं, सत्ता के खिलाफ सीधी चुनौती बन चुके हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उन्होंने BJP सरकार पर ऐसा हमला बोला है, जिसने उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज़ कर दी है। अलका लांबा ने दो टूक कहा कि BJP ‘बेटी बचाओ’ का नारा देती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में वह अपराधी और एक रहस्यमय “VIP” को बचाने में जुटी हुई है। उनका कहना है कि यह मामला अब एक बेटी की हत्या से कहीं आगे निकल चुका है—यह सत्ता, संरक्षण और सच को दबाने की शर्मनाक कहानी बन गया है।

अलका लांबा ने तीखे लहजे में कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ़ होती, तो अब तक उस VIP का नाम देश के सामने होता। उन्होंने सवाल दागा—आख़िर किसका डर है सरकार को? किस रसूखदार को बचाने के लिए जांच को घुमाया जा रहा है? उनका आरोप है कि जानबूझकर जांच को सीमित दायरे में रखा जा रहा है, ताकि सच्चाई सामने न आ सके। यही वजह है कि आज आम लोग, महिलाएं, छात्र और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतरकर CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सीधा वार करते हुए अलका लांबा ने कहा कि अब CBI जांच से बचने का रास्ता बंद हो चुका है। “अब मुख्यमंत्री पल्ला नहीं झाड़ सकते,” कहते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक दबाव में सच को दफन करने की कोशिश कर रही है। उनका साफ कहना है कि BJP चाहे जितनी कोशिश कर ले, उस VIP को हमेशा के लिए नहीं बचा सकती, क्योंकि अब पूरा देश एक ही सवाल पूछ रहा है—वह VIP कौन था?

महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने BJP के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे को खोखला और पाखंडपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि जब सच में एक बेटी को बचाने और उसे इंसाफ दिलाने की बारी आती है, तो सरकार की संवेदनशीलता अचानक गायब हो जाती है। “अगर सरकार को बेटियों की फिक्र होती, तो आज अंकिता के परिवार को सड़क पर न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ता,” उन्होंने कहा। यह मामला, उनके मुताबिक, BJP सरकार के महिला सुरक्षा के दावों पर करारा तमाचा है।

अलका लांबा ने साफ चेतावनी दी कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि न्याय बनाम सत्ता की लड़ाई है। उन्होंने मांग की कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को तुरंत CBI को सौंपा जाए, ताकि पूरी सच्चाई सामने आए—चाहे वह कितनी भी असहज क्यों न हो। उनका ऐलान साफ है: जब तक अंकिता को इंसाफ नहीं मिलेगा, यह आवाज़ न रुकेगी—न सड़कों पर, न संसद में, न देश की अंतरात्मा में।

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