राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कोटा | 18 जून 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा मॉडल छात्रों को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें लगातार असफलता और निराशा की ओर धकेल रहा है। राहुल गांधी ने इसे “सेलेक्शन सिस्टम नहीं, रिजेक्शन सिस्टम” बताते हुए कहा कि देश के करोड़ों युवाओं के सपने पेपर लीक, भर्ती घोटालों और अवसरों की कमी के कारण टूट रहे हैं।
कोटा में छात्रों, अभिभावकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत का एजुकेशन सिस्टम अब प्रतिभा को निखारने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह ऐसा ढांचा बन गया है जो लाखों युवाओं को बाहर कर देता है। उन्होंने कहा कि एक हजार युवाओं में से केवल कुछ को ही सरकारी नौकरी मिल पाती है, जबकि बाकी युवा वर्षों की मेहनत के बाद भी बेरोजगारी और अनिश्चितता का सामना करते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में शिक्षा अब एक महंगा कारोबार बनती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि NEET, JEE, SSC, UPSC और रेलवे भर्ती जैसी प्रमुख परीक्षाओं की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यह राशि केंद्र सरकार के पूरे शिक्षा बजट से कई गुना अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार अपनी आय का इतना बड़ा हिस्सा बच्चों के भविष्य पर खर्च कर रहे हैं, तब भी उन्हें निष्पक्ष परीक्षा और रोजगार की गारंटी क्यों नहीं मिल रही।
अपने लगभग 44 मिनट के संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने युवाओं का विश्वास तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि मेहनत और प्रतिभा के आधार पर सफलता पाने का सपना तब टूट जाता है जब परीक्षा प्रश्नपत्र पहले ही बाजार में बिकने लगते हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद कई छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए। छात्रों ने कहा कि वर्षों तक कठिन मेहनत करने के बाद जब परीक्षा रद्द हो जाती है या पेपर लीक हो जाता है, तो ऐसा लगता है जैसे सपनों पर किसी ने बुलडोजर चला दिया हो। कई छात्रों ने भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और नौकरी के सीमित अवसरों को लेकर भी चिंता जताई।
राहुल गांधी ने छात्र आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दबाव, भविष्य की अनिश्चितता और लगातार असफलता का डर युवाओं को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बेरोजगारी के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कहा कि देश में लाखों शिक्षित युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार से वंचित हैं। राहुल ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई देश के सामने गंभीर चुनौती बन चुकी है।
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से इस अभियान को देशव्यापी जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा या नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि देश के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने और व्यवस्था में सुधार की मांग करने का आह्वान किया।
कोटा, जिसे देश की कोचिंग राजधानी माना जाता है, वहां से राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि देश के युवा कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे, वे केवल निष्पक्ष अवसर, सम्मान और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार चाहते हैं।
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर देशभर में बहस जारी है और छात्र लगातार परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।




