नई दिल्ली 17 सितम्बर 2025
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने बहुजन समाज के मुद्दों पर बड़ी बातचीत करते हुए कहा है कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कांशीराम की ‘वैचारिक विरासत’ को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने कांशीराम के विचारों को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि मायावती दलितों के मूल हितों के प्रति अब मुखर नहीं हैं और उनकी राजनीतिक राह कांशीराम के साथ मेल नहीं खाती।
राजेंद्र पाल ने सवाल उठाया कि मायावती भाजपा और उसके द्वारा दलितों व अन्य पिछड़े वर्गों के खिलाफ की जा रही नीतियों पर क्यों चुप्पी साध लेती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी जाति जनगणना के जरिए समाज के उन हिस्सों को उनकी असली हिस्सेदारी दिलाना चाहते हैं, जो आज तक अपने अधिकारों से वंचित रहे हैं। इसका मकसद समाज में सबके लिए समान अवसर और न्याय सुनिश्चित करना है।
पाल ने बताया कि राहुल गांधी की पहल सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा दे रही है और वे दलितों व पिछड़े वर्गों के उत्थान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, “मायावती को मैंने समाज के लिए लड़ते नहीं देखा, जबकि कांग्रेस में इस मामले में बड़ा बदलाव आया है। हम जाति जनगणना के कदम का जश्न मनाने जा रहे हैं, जो भारत के समाज में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा।”
राजेंद्र पाल ने उम्मीद जताई कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को बहुजन समाज का भरपूर समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि कई दलित नेता बदलाव के नाम पर मायावती का साथ छोड़ चुके हैं और कांग्रेस को एक बेहतर विकल्प मानते हैं।
राजेंद्र पाल ने यह भी कहा कि अलग-अलग समय पर कई नेताओं ने सामाजिक न्याय के लिए लड़ाई लड़ी लेकिन वर्तमान में यह लड़ाई राहुल गांधी के नेतृत्व में मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि वे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, लेकिन अब कांग्रेस के साथ हैं और दलितों व पिछड़े वर्गों के हक के लिए कांग्रेस में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
इस बयान के माध्यम से राजेंद्र पाल ने कांग्रेस व कांग्रेस नेतृत्व वाले संघर्ष को सामाजिक न्याय के लिए एक नई उम्मीद और दिशा बताई है, जबकि मायावती पर असंतोष जताया है कि वे कांशीराम के विचारों से अलग होकर दलित राजनीतिकरण की परंपरा से हट गई हैं।




