[the_ad id="179"]
Home » National » राहुल की मांग – कांशीराम को भारत रत्न मिले: यूपी-पंजाब में दलित वोट पर नजर, बीजेपी के लिए बढ़ी असहजता

राहुल की मांग – कांशीराम को भारत रत्न मिले: यूपी-पंजाब में दलित वोट पर नजर, बीजेपी के लिए बढ़ी असहजता

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 16 मार्च 2026

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और दलित आंदोलन के प्रमुख नेता कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा यह मांग उठाए जाने के बाद इसे केवल सम्मान की बहस नहीं बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे के जरिए राहुल गांधी उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे अहम राज्यों में दलित वोटों को कांग्रेस की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान संविधान और आरक्षण से जुड़े मुद्दों ने बड़ा राजनीतिक असर दिखाया था। विपक्ष ने लगातार यह आरोप लगाया कि संविधान और सामाजिक न्याय की व्यवस्था खतरे में है, जिसके कारण कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। खासकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में यदि दलित मतदाता बड़े पैमाने पर विपक्ष की ओर लामबंद होते हैं तो भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में राजनीतिक चुनौती और बढ़ सकती है।

जनसांख्यिकीय दृष्टि से भी यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत के आसपास है, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती है। वहीं पंजाब में दलितों की आबादी लगभग 32 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक मानी जाती है। यही वजह है कि दोनों राज्यों में दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश लगभग हर राजनीतिक दल करता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग इसी रणनीति का हिस्सा है। कांशीराम को दलित राजनीति का बड़ा प्रतीक माना जाता है और उनके नाम पर सम्मान की मांग दलित समाज के बीच एक मजबूत संदेश देती है। राहुल गांधी का यह कदम कांग्रेस को दलित समाज के बीच फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इस मुद्दे का दूसरा पहलू यह भी है कि इससे भाजपा के सामने राजनीतिक दुविधा खड़ी हो सकती है। यदि केंद्र सरकार कांशीराम को भारत रत्न देने की घोषणा नहीं करती तो विपक्ष इसे दलित सम्मान के मुद्दे के रूप में उठाकर राजनीतिक दबाव बना सकता है। वहीं यदि आगामी चुनावों से पहले यह सम्मान दिया जाता है तो विपक्ष इसे अपनी मांग की जीत और अपनी राजनीतिक पहल का परिणाम बताकर चुनावी फायदा उठाने की कोशिश करेगा।

कुल मिलाकर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग अब केवल सम्मान की बहस तक सीमित नहीं रह गई है। यह मुद्दा उत्तर प्रदेश और पंजाब की चुनावी राजनीति, दलित वोट बैंक और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नैरेटिव को प्रभावित करने वाला एक बड़ा राजनीतिक विषय बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और इसका आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *