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ऑपरेशन सिंदूर के पीड़ित बच्चों के लिए राहुल गांधी बने सहारा, 22 अनाथ बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएंगे

जम्मू
28 जुलाई
भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए विनाशकारी संघर्ष में जम्मू-कश्मीर के पुंछ ज़िले में अपने माता-पिता को खो चुके 22 बच्चों की जिम्मेदारी अब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उठाई है। कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने जानकारी दी कि श्री गांधी इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का संपूर्ण खर्च उठाएंगे।
कर्रा के अनुसार, पाकिस्तानी गोलाबारी में जिन बच्चों ने अपने दोनों माता-पिता या परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य को खो दिया है, उनकी शिक्षा को जारी रखने के लिए पहली किस्त बुधवार को जारी की जाएगी। राहुल गांधी ने यह सहायता तब घोषित की थी जब वे अन्य दलों के नेताओं के साथ पुंछ दौरे पर गए थे और वहां पीड़ित परिवारों से मिले थे।
इस पहल के अंतर्गत एक सर्वे किया गया, जिसमें सरकारी अभिलेखों से मिलान के बाद 22 बच्चों की सूची तैयार की गई। कर्रा ने बताया कि यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक बच्चे स्नातक की पढ़ाई पूरी नहीं कर लेते।
इस दौरान राहुल गांधी ने क्राइस्ट पब्लिक स्कूल का भी दौरा किया, जहां के छात्र—12 वर्षीय जुड़वां भाई-बहन उरबा फातिमा और ज़ैन अली—इस हिंसा के शिकार हुए थे। बच्चों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं आप पर गर्व महसूस करता हूं। अपने दोस्तों की याद आ रही होगी और डर भी लग रहा होगा, लेकिन सब कुछ फिर से सामान्य हो जाएगा। आपको मेहनत से पढ़ाई करनी है, खेलना है और ढेर सारे दोस्त बनाने हैं।”
गौरतलब है कि 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान की ओर से की गई अंधाधुंध गोलाबारी में पुंछ सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 13 नागरिकों की मौत हुई। यह हमला भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत आतंकवादी ठिकानों पर की गई जवाबी कार्रवाई के बाद हुआ था। इस अभियान की पृष्ठभूमि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से जुड़ी है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।
तारिक कर्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस के किसी प्रकार के मतभेद नहीं हैं, हालांकि बीते नौ महीनों से समन्वय समिति का गठन लंबित है।
राहुल गांधी द्वारा लिया गया यह मानवीय कदम उन बच्चों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है, जो ऑपरेशन सिंदूर की विभीषिका के बीच भविष्य के सपने संजोने की कोशिश कर रहे हैं।

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