[the_ad id="179"]
Home » National » दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस के ‘मेटा चश्मे’ पर सवाल! क्या पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों की हो रही थी गुप्त रिकॉर्डिंग?

दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस के ‘मेटा चश्मे’ पर सवाल! क्या पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों की हो रही थी गुप्त रिकॉर्डिंग?

इंडियन एक्सप्रेस हिंदी की टीम ने 10 अक्टूबर को तीन स्टार वाले एक पुलिस अधिकारी को रेबैन मेटा स्मार्ट चश्मा पहने देखा। अखबार ने पूछा—क्या पुलिस को निगरानी के लिए ऐसे चश्मे दिए गए हैं, या ड्यूटी के दौरान निजी तौर पर रिकॉर्डिंग की जा रही थी?

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026

दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक पुलिस अधिकारी के रेबैन मेटा स्मार्ट चश्मे पहने होने की घटना ने निगरानी और निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इंडियन एक्सप्रेस हिंदी की टीम के मुताबिक, शाम करीब छह बजे रिपोर्टिंग के दौरान विजय और स्वाति की बातचीत एक ऐसे पुलिस अधिकारी से हुई, जिसके कंधे पर तीन स्टार थे और जिसने क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाला हेलमेट पहन रखा था। बातचीत के दौरान टीम की नजर उसके चश्मे पर गई, जो रेबैन मेटा स्मार्ट ग्लासेज बताए गए। पत्रकारों को आशंका हुई कि इन चश्मों से रिकॉर्डिंग की जा रही हो सकती है।

बातचीत के दौरान सामने आया स्मार्ट चश्मा

इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के अनुसार, बातचीत के दौरान पुलिस अधिकारी ने ऐसा व्यवहार किया, मानो वह विजय को पहले से जानता हो। विजय ने इससे इनकार किया, लेकिन अधिकारी बातचीत जारी रखे रहा। इसी दौरान पत्रकारों का ध्यान उसके चश्मे पर गया। टीम ने आशंका जताई कि अधिकारी स्मार्ट चश्मे के जरिए रिकॉर्डिंग कर रहा हो सकता है। सवाल पूछे जाने पर अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि वह रिकॉर्डिंग नहीं कर रहा था।

अखबार की टीम ने बाद में अपनी फुटेज की जांच की और पाया कि संबंधित अधिकारी की तस्वीरें उसके कैमरे में कैद हुई थीं। अखबार ने इस तस्वीर के आधार पर पुलिस की ड्यूटी में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल और संभावित रिकॉर्डिंग को लेकर सवाल उठाए हैं।

पुलिस को स्मार्ट चश्मे किसने दिए?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारी ने ये चश्मे अपनी निजी पसंद से पहने थे या पुलिस विभाग की ओर से उन्हें ऐसे उपकरण दिए गए थे। यदि विभाग ने स्मार्ट चश्मे उपलब्ध कराए हैं, तो उनका उद्देश्य क्या है? क्या इनका इस्तेमाल निगरानी, साक्ष्य जुटाने या प्रदर्शन के दौरान घटनाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए किया जा रहा है? यदि ऐसा है, तो इसके लिए क्या आधिकारिक दिशा-निर्देश और जवाबदेही की व्यवस्था है?

दूसरी ओर, यदि चश्मे अधिकारी के निजी थे, तो सवाल उठता है कि क्या ड्यूटी के दौरान ऐसे उपकरण पहनकर लोगों की रिकॉर्डिंग करने की अनुमति है। क्या पुलिसकर्मियों के लिए इस संबंध में कोई स्पष्ट नियम हैं? और यदि रिकॉर्डिंग की जाती है, तो उसे किस उद्देश्य से सुरक्षित रखा जाता है, उस तक किसकी पहुंच होती है और उसका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा सकता है?

प्रदर्शन की कवरेज के बीच निजता का सवाल

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और पत्रकार दोनों सार्वजनिक घटनाओं को रिकॉर्ड कर सकते हैं, लेकिन स्मार्ट चश्मों जैसे उपकरणों से रिकॉर्डिंग की प्रकृति आम लोगों के लिए आसानी से पहचानना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में पारदर्शिता और स्पष्ट नियम जरूरी हैं। खासकर तब, जब अधिकारी प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और अन्य नागरिकों के बीच मौजूद हों और बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति को यह स्पष्ट न हो कि उसकी रिकॉर्डिंग हो रही है या नहीं।

हालांकि, उपलब्ध विवरण से यह साबित नहीं होता कि अधिकारी ने वास्तव में रिकॉर्डिंग की थी या वह किसी आधिकारिक निगरानी अभियान का हिस्सा था। अधिकारी ने रिकॉर्डिंग से इनकार किया था। इसीलिए मामले की निष्पक्ष जांच और पुलिस विभाग की स्पष्ट प्रतिक्रिया जरूरी है।

दिल्ली पुलिस को देना चाहिए जवाब

इंडियन एक्सप्रेस हिंदी ने जिन सवालों को उठाया है, उनका जवाब दिल्ली पुलिस को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए। क्या ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को मेटा स्मार्ट चश्मे इस्तेमाल करने की अनुमति है? क्या इस अधिकारी ने कोई रिकॉर्डिंग की? यदि हां, तो किस उद्देश्य से और किन नियमों के तहत? यदि नहीं, तो क्या विभाग यह स्पष्ट कर सकता है कि ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर उसकी नीति क्या है?

लोकतंत्र में पुलिस की जवाबदेही और नागरिकों की निजता दोनों महत्वपूर्ण हैं। तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा और जांच में मददगार हो सकता है, लेकिन उसका उपयोग स्पष्ट नियमों, उचित निगरानी और जवाबदेही के दायरे में होना चाहिए। दिल्ली में प्रदर्शन की कवरेज के दौरान सामने आया यह मामला अब केवल एक पुलिस अधिकारी के चश्मे तक सीमित नहीं है—यह सवाल बन गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की रिकॉर्डिंग कौन कर सकता है, किस उद्देश्य से कर सकता है और इसकी निगरानी कौन करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *