[the_ad id="179"]
Home » National » दिल्ली में 40 हजार अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर प्रशांत किशोर का तंज—‘यही सबूत है कि प्रदर्शन सफल रहा’

दिल्ली में 40 हजार अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर प्रशांत किशोर का तंज—‘यही सबूत है कि प्रदर्शन सफल रहा’

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बिहार के बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन को रोकने के लिए 40 हजार अर्धसैनिक बलों की तैनाती इस बात का पर्याप्त संकेत है कि आंदोलन कितना प्रभावशाली था। प्रशांत किशोर के मुताबिक, बहस इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हुए, बल्कि इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि सरकार को प्रदर्शन के दौरान इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था क्यों करनी पड़ी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले आठ से दस वर्षों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनके बयान ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

‘प्रदर्शन में कितने लोग आए, इससे ज्यादा अहम सुरक्षा तैनाती’

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सवाल किए जा रहे हैं, लेकिन सरकार को प्रदर्शन रोकने के लिए 40 हजार अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी, यह अपने आप में आंदोलन की ताकत को दिखाता है। उन्होंने इसे प्रदर्शन की सफलता का प्रमाण बताया। हालांकि, यह आंकड़ा और इसके आधार पर निकाला गया निष्कर्ष प्रशांत किशोर का बयान है। सुरक्षा बलों की तैनाती अपने आप में किसी प्रदर्शन के जनसमर्थन या सफलता का स्वतंत्र प्रमाण नहीं होती, लेकिन इतने बड़े सुरक्षा इंतजामों ने दिल्ली में कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक आवाजाही और विरोध के अधिकार को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। प्रदर्शन के दौरान राजधानी के कई इलाकों में बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंध लगाए गए थे। विपक्षी नेताओं ने इन व्यवस्थाओं को लेकर सरकार की आलोचना की, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की अपनी जिम्मेदारियां भी हैं।

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रशांत किशोर के सवाल

प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले आठ से दस वर्षों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उनके अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन लोगों के चुनाव आयोग पर घटते भरोसे को दर्शाते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, फॉर्म 6 तथा फॉर्म 7 और चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इन मुद्दों पर विपक्ष का कहना है कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए शिकायतों का निष्पक्ष समाधान जरूरी है। हालांकि, चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य मानने के बजाय उनकी जांच और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आकलन किया जाना चाहिए। चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और इस पर उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।

बिहार चुनाव में 10 हजार रुपये वितरण का मुद्दा भी उठाया

प्रशांत किशोर ने बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान जीविका कार्यकर्ताओं को 10-10 हजार रुपये दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग बिहार सरकार को इस तरह की राशि वितरित करने से रोक नहीं पाया। उनके बयान में यह सवाल भी शामिल था कि चुनाव के दौरान सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता के वितरण पर निगरानी किस तरह की गई। यह मुद्दा चुनावी निष्पक्षता और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है। हालांकि, किसी विशेष वितरण को चुनाव नियमों का उल्लंघन मानने के लिए संबंधित आदेशों, समय, पात्रता, लागू नियमों और चुनाव आयोग की कार्रवाई की पूरी जानकारी जरूरी है। प्रशांत किशोर ने इसे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के संदर्भ में पेश किया, जबकि इस मामले पर अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

बिहार में NDA पर भी साधा निशाना

दिल्ली के प्रदर्शन के अलावा प्रशांत किशोर ने बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA की बैठक पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे सत्तारूढ़ गठबंधन की बढ़ती राजनीतिक असुरक्षा का संकेत बताया। किशोर ने कहा कि जिस तरह बांकीपुर में उपचुनाव से पहले बड़ी संख्या में नेताओं की बैठक हुई थी, उसी तरह विधान परिषद चुनावों को लेकर भी NDA में बेचैनी दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षक और स्नातक मतदाता सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों को हराने का मन बना चुके हैं। यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक आकलन है; चुनाव परिणाम आने से पहले मतदाताओं के रुख को निश्चित मानना संभव नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 23 अक्टूबर को होने वाले पटना स्नातक सीट के चुनाव में जदयू विधायक अनंत कुमार सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के मुकाबले जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया है। यह घटनाक्रम बिहार में गठबंधन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बांकीपुर की जीत के बाद प्रशांत किशोर का दावा

प्रशांत किशोर ने अगस्त में बांकीपुर उपचुनाव में जीत हासिल की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने भाजपा के मजबूत माने जाने वाले इस क्षेत्र में 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इस सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पांच कार्यकाल तक कर चुके थे। इस जीत के बाद प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में अपनी पार्टी की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली के प्रदर्शन पर उनका बयान भी ऐसे समय आया है, जब वे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

दिल्ली में प्रदर्शन, चुनाव आयोग पर उठते सवाल और बिहार में आगामी विधान परिषद चुनाव—इन तीनों घटनाक्रमों ने प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय राजनीतिक बहस में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दिया है। अब अहम सवाल यह है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रही शिकायतों पर क्या जवाब देता है और राजनीतिक दलों के आरोपों का समाधान किस तरह होता है। लोकतंत्र में चुनावी संस्थाओं पर भरोसा कायम रखना केवल किसी एक दल की नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं और राजनीतिक पक्षों की जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *