[the_ad id="179"]
Home » National » रिहाई के बाद अभिजीत दीपके का PM मोदी पर तीखा हमला—‘भारत ने इतना बड़ा कायर और तानाशाह पहले कभी नहीं देखा’

रिहाई के बाद अभिजीत दीपके का PM मोदी पर तीखा हमला—‘भारत ने इतना बड़ा कायर और तानाशाह पहले कभी नहीं देखा’

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरोध में उतरी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की हिरासत ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। करीब 24 घंटे की हिरासत के बाद CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को सशर्त रिहा कर दिया गया। रिहाई के तुरंत बाद अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “प्रधानमंत्री के रूप में मोदी भारत के लिए शर्म की बात हैं। इस देश ने इतना बड़ा कायर और तानाशाह पहले कभी नहीं देखा।” दीपके की इस टिप्पणी ने पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है। CJP का कहना है कि उसके नेताओं को हिरासत में लेने से आंदोलन की आवाज दबाई नहीं जा सकती और चुनावी पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देना ही होगा।

एहतियाती हिरासत के बाद मिली सशर्त रिहाई

दिल्ली पुलिस के अनुसार, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने बताया कि तीनों को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरवाया गया और उन्हें रिहा कर दिया गया। CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी तीनों नेताओं की रिहाई की जानकारी दी। पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि उसके नेता आखिरकार रिहा हो गए हैं और आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, यह रिहाई निर्धारित शर्तों के साथ हुई है, इसलिए इसे सभी कानूनी विवादों का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन

CJP के विरोध प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग है। प्रदर्शन से जुड़े पक्षों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और फॉर्म 6 तथा फॉर्म 7 की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। CJP और विपक्ष से जुड़े कई नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कायम रखने के लिए इन शिकायतों का जवाब मांगा है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी के सभी आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष भी इस बहस का अहम हिस्सा है। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित संस्थाओं की ओर से स्पष्ट जवाब लोकतांत्रिक भरोसे के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, यातायात पर असर

प्रदर्शन के दूसरे दिन दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी। ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, 11 अक्टूबर को सुबह छह बजे से हालात के आधार पर लगभग 30 प्रमुख स्थानों पर यातायात का मार्ग बदला जा सकता था। जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस और पटेल चौक जैसे इलाकों में आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग और जांच बढ़ाई। रविवार को मेट्रो स्टेशन खुले रहे और ट्रेनें निर्धारित समय पर चलती रहीं। प्रदर्शनकारियों और समर्थकों के लिए इन प्रतिबंधों के बीच जंतर-मंतर तक पहुंचना चुनौती बना रहा। विरोध प्रदर्शन से जुड़ी पाबंदियों और हिरासत को लेकर कानूनी सवाल भी उठे, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, विपक्ष ने उठाए सवाल

11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने संबंधित वकीलों को अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया। सुनवाई के दौरान हिरासत के मामलों के साथ कथित अवमानना से जुड़ी याचिका भी उठाई गई। विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही तय करने और चुनावी अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों का समाधान करने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से विपक्ष के साथ बातचीत करने की अपील की। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को गलत बताया।

रिहाई के बाद आंदोलन जारी रखने का संदेश

अभिजीत दीपके की रिहाई और प्रधानमंत्री पर उनकी तीखी टिप्पणी के बाद CJP ने साफ संकेत दिया कि वह अपने विरोध को समाप्त नहीं मानती। पार्टी की ओर से जारी संदेश में आंदोलन जारी रखने की बात कही गई। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की विश्वसनीयता, प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों पर संबंधित संस्थाएं क्या जवाब देती हैं और अदालत में उठाए गए मुद्दों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। लोकतंत्र में विरोध की आवाज सुनना, कानून का पालन सुनिश्चित करना और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना—तीनों ही पक्षों की जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *