[the_ad id="179"]
Home » National » टैरिफ विवाद और भारत-अमेरिका डील पर पी. चिदंबरम के सवाल, सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

टैरिफ विवाद और भारत-अमेरिका डील पर पी. चिदंबरम के सवाल, सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 22 फरवरी 2026

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और टैरिफ विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता P. Chidambaram ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति Donald Trump के ‘reciprocal tariffs’ को निरस्त किए जाने के बाद भी ट्रंप प्रशासन द्वारा नए रास्तों से टैरिफ लागू करने की कोशिशें चौंकाने वाली नहीं हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि कुछ लोग इन कदमों को सही ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। चिदंबरम ने कहा कि टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बाधित किया है और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली के विपरीत प्रभाव डाला है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह समझा जा रहा है कि इन टैरिफ का असर भारत के निर्यात पर पड़ेगा और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। उनके अनुसार ट्रंप की टैरिफ नीति को कई देशों ने व्यापार को हथियार बनाने की रणनीति के रूप में देखा है और इसकी आलोचना भी की है।

कांग्रेस नेता ने अमेरिका-भारत संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा यह दावा किया गया कि भारत टैरिफ का भुगतान करेगा जबकि अमेरिका नहीं करेगा, ऐसे बयान समझौते की पारस्परिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या यह वही पारस्परिकता है जिसकी उम्मीद संयुक्त बयान जारी होने के समय जताई गई थी और क्या सरकार द्वारा इसे उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित था।

चिदंबरम ने अपने पूर्व लेख का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को रद्द करता है तो दोनों देशों को पहले की स्थिति में लौटना चाहिए था। लेकिन उनका आरोप है कि इस बीच अमेरिका ने भारत से कई रियायतें हासिल कर लीं जबकि बदले में समान रियायतें नहीं दी गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन रियायतों का भविष्य क्या होगा और क्या भारत को अपेक्षित लाभ मिल पाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त बयान में अमेरिकी निर्यात के लिए कई वस्तुओं पर शून्य टैरिफ, भारत द्वारा अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान आयात करने की योजना, रूसी तेल खरीद में कमी और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने जैसे बिंदु शामिल थे। चिदंबरम ने पूछा कि अदालत के फैसले के बाद इन वादों और प्रतिबद्धताओं की स्थिति क्या होगी।

कांग्रेस नेता ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस समय अमेरिका में ढांचा समझौते के अंतिम स्वरूप पर बातचीत कर रहा है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ताजा न्यायिक घटनाक्रम के बाद बातचीत की दिशा क्या होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 6 फरवरी को घोषित भारत-अमेरिका समझौते पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव को लेकर देश के सामने स्पष्ट स्थिति रखी जाए।

टैरिफ और व्यापार समझौते से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में संसद और सार्वजनिक विमर्श में प्रमुख मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसमें निर्यात, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *