राष्ट्रीय | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026
दिल्ली की सियासत में इन दिनों एक दिलचस्प तस्वीर उभर रही है। विपक्षी दल एक मंच पर खड़े तो नहीं दिख रहे, लेकिन उनकी राजनीतिक दिशा लगभग एक जैसी है। कोई जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ है, कोई संसद के भीतर सरकार को घेर रहा है, तो कोई प्रधानमंत्री आवास तक विरोध दर्ज करा रहा है। अलग-अलग रास्तों से चल रहे इन प्रयासों का मकसद एक ही है—NEET पेपर लीक, छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाना।
मंगलवार की घटनाओं ने यह साफ संकेत दिया कि INDIA गठबंधन के दल अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान और शैली बरकरार रखते हुए भी साझा मुद्दों पर एक-दूसरे के पूरक बनते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकार इसे दिवंगत माकपा नेता सीताराम येचुरी की उस रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जिसे वे अक्सर कहते थे—”अलग-अलग मार्च करो, लेकिन एक साथ वार करो।” यानी संगठन अलग रहें, लेकिन साझा मुद्दों पर आवाज एक हो।
इसी रणनीति की झलक मंगलवार को राजधानी में साफ दिखाई दी। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर सरकार को चुनौती दी। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेता जंतर-मंतर और अस्पताल पहुंचकर आंदोलनकारी छात्रों और घायलों के प्रति समर्थन जताते रहे। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), वाम दलों और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी अलग-अलग माध्यमों से छात्र आंदोलन के पक्ष में अपनी बात रखी।
हालांकि विपक्षी दलों की राजनीतिक शैली और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, लेकिन इस पूरे मुद्दे पर उनकी मांगें लगभग एक जैसी हैं। सभी दल NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।
संसद के भीतर भी विपक्ष ने इसी मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने अलग-अलग मंचों से छात्रों की आवाज उठाई। अखिलेश यादव ने संसद में कहा कि यह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
हालांकि विपक्ष के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना CJP आंदोलन का फोकस बदलने की कोशिश थी। कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों के समर्थन में किया गया हर लोकतांत्रिक विरोध स्वागत योग्य है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
संसद के अंदर भी विपक्षी दलों ने तालमेल दिखाया। राज्यसभा में नियम 267 के तहत छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा की मांग की गई, जबकि लोकसभा में भी विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगा। दूसरी ओर सरकार ने कहा कि वह NEET पेपर लीक सहित सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन हंगामे के कारण दोनों सदनों का कामकाज लगातार प्रभावित होता रहा।
यह भी सच है कि INDIA गठबंधन के भीतर कई राजनीतिक मतभेद अब भी कायम हैं और कई राज्यों में ये दल एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी भी हैं। लेकिन फिलहाल छात्र आंदोलन और NEET जैसे मुद्दों ने उन्हें एक साझा राजनीतिक जमीन दे दी है। अब यह देखना होगा कि सड़क पर दिख रही यह एकजुटता संसद के भीतर किसी ठोस राजनीतिक परिणाम में बदलती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल दी है—रास्ते भले अलग हों, लेकिन लड़ाई अब एक ही मुद्दे पर केंद्रित दिखाई दे रही है।




