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ऑपरेशन टाइगर सफल: छह सांसदों के साथ शिंदे की ताकत दोगुनी, महाराष्ट्र की राजनीति में नया शक्ति संतुलन

राष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 23 जून 2026

शिंदे का बड़ा दावा: ऑपरेशन टाइगर हुआ सफल

महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बने “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर आखिरकार बड़ा घटनाक्रम सामने आ गया। शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उनका “ऑपरेशन टाइगर” पूरी तरह सफल रहा है। इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों को मीडिया के सामने पेश किया गया, जिन्होंने शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उनके साथ आने का फैसला किया।

प्रेस वार्ता में एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह केवल राजनीतिक संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों और विकास की राजनीति पर विश्वास जताने वाले जनप्रतिनिधियों का निर्णय है। उन्होंने कहा कि सांसदों ने जनता के हित और अपने क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है।

13 सांसदों के साथ शिवसेना बनी सबसे मजबूत क्षेत्रीय शक्ति

छह सांसदों के शामिल होने के बाद लोकसभा में शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। शिंदे ने दावा किया कि महाराष्ट्र से लोकसभा में उनकी पार्टी अब सबसे बड़े राजनीतिक समूहों में शामिल हो गई है।

उन्होंने कहा कि जनता ने विकास, स्थिरता और निर्णायक नेतृत्व को समर्थन दिया है। यही कारण है कि विभिन्न दलों के नेता और जनप्रतिनिधि लगातार उनकी विचारधारा और नेतृत्व से जुड़ रहे हैं।

विकास और नेतृत्व पर जताया भरोसा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल सांसदों ने भी कहा कि उन्होंने किसी दबाव में नहीं बल्कि अपने राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया है। उनका कहना था कि राज्य और केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्यों को गति देने के लिए यह फैसला आवश्यक था।

सांसदों ने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों ने उन्हें विकास और जनसेवा के लिए चुना है। ऐसे में राजनीतिक टकराव की राजनीति से ज्यादा जरूरी है कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा किया जाए।

2022 के बाद शिंदे की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद यह एकनाथ शिंदे की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जा रही है। पहले विधायकों का बड़ा समूह उनके साथ आया, उसके बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को दिया। अब सांसदों का समर्थन मिलने से उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लोकसभा में संख्या बढ़ने से न केवल शिंदे की राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हैसियत मजबूत होगी, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी उनका प्रभाव बढ़ेगा।

विपक्ष पर साधा निशाना

एकनाथ शिंदे ने विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह किसी प्रकार की राजनीतिक तोड़फोड़ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि किसी नेतृत्व पर विश्वास जताते हैं तो उसे राजनीतिक अवसरवाद बताना उचित नहीं है।

शिंदे ने कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले चुनावों में विकास की राजनीति को ही समर्थन मिलेगा।

महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण

छह सांसदों के शिंदे खेमे में आने से महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। महाविकास आघाड़ी के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन को इससे नई राजनीतिक ऊर्जा मिली है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल लोकसभा की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

इतना तय है कि “ऑपरेशन टाइगर” ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है और एकनाथ शिंदे ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी राजनीतिक पकड़ पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।

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