अवधेश कुमार । नई दिल्ली 3 दिसंबर 2025
देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC (Oil and Natural Gas Corporation) में शीर्ष स्तर पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने वर्तमान चेयरमैन अरुण कुमार सिंह को एक वर्ष का सेवा विस्तार देने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य लगातार बदल रहा है, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, और भारत ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई रणनीतियाँ तैयार कर रहा है। ऐसे में अनुभवी नेतृत्व की निरंतरता को सरकार एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
अरुण सिंह, जिन्होंने ONGC के कारोबार को स्थिरता और विस्तार दोनों की दिशा में आगे बढ़ाया, अब एक अतिरिक्त वर्ष तक कंपनी की कमान संभालते रहेंगे। यह विस्तार न सिर्फ यह संकेत देता है कि सरकार उनके कामकाज से संतुष्ट है, बल्कि यह भी कि ONGC के भीतर नेतृत्व परिवर्तन फिलहाल प्रमुख प्राथमिकता नहीं है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इस निर्णय से कंपनी को अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स, उत्पादन बढ़ाने की योजना और विदेशी ऊर्जा कंपनियों के साथ साझेदारियों में स्थिरता मिलेगी।
इसी बीच, सरकार ने 3-सदस्यीय Search-cum-Selection Committee का गठन किया है जो ONGC के लिए नियमित चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया को अंजाम देगी। इस कमेटी का नेतृत्व PESB (Public Enterprises Selection Board) के चेयरमैन करेंगे। समिति में विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनका काम होगा—योग्य उम्मीदवारों की पहचान करना, उनका मूल्यांकन करना, और कंपनी के भविष्य को दिशा देने में सक्षम वैकल्पिक नेतृत्व चुनना। यह संकेत है कि सरकार भविष्य में ONGC के शीर्ष नेतृत्व में एक स्थायी, दीर्घकालिक संरचना लागू करना चाहती है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि नियमित चेयरमैन की चयन प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं, इसलिए फिलहाल अरुण सिंह को विस्तार देकर ONGC के संचालन में किसी भी संभावित अस्थिरता को रोकने का प्रयास किया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में ONGC का महत्व किसी से छिपा नहीं है—देश के कुल तेल और गैस उत्पादन का बड़ा हिस्सा यही कंपनी करती है, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की अस्थिरता से निपटने में इसका प्रदर्शन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालता है।
पिछले कुछ वर्षों में ONGC को उत्पादन घटने, पुरानी खोज परियोजनाओं में देरी और नई खोजों के लिए पूंजीगत निवेश की आवश्यकता जैसे कई रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे समय में अनुभवी चेयरमैन का लगातार बने रहना कंपनी के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है। वहीं, Search-cum-Selection Committee का गठन उन अपेक्षाओं को भी दर्शाता है कि सरकार ONGC को अगले दशक की ऊर्जा आवश्यकताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने पर गंभीरता से काम कर रही है।
फिलहाल, ऊर्जा क्षेत्र में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई समिति किस तरह चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और क्या नया चेयरमैन ONGC को ऊर्जा परिदृश्य की आने वाली चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार कर पाएगा। यह निर्णय आने वाले महीनों में भारत की ऊर्जा रणनीति और नीति के केंद्र में रहने वाला है।




