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घर लौटने के लिए भी गैस नहीं… बेंगलुरु में ऑटो LPG संकट गहराया, कतारों में रात काटने को मजबूर चालक

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 2 अप्रैल 2026

बेंगलुरु की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही तस्वीर नजर आ रही है। जहां आम दिनों में भागती-दौड़ती ऑटो रिक्शा शहर की रफ्तार का प्रतीक होते हैं, वहीं अब वही ऑटो पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। वजह है—ऑटो LPG की भारी कमी, जिसने हजारों चालकों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है।

कई ड्राइवरों का कहना है कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि उनके पास घर तक लौटने के लिए भी गैस नहीं बचती। दिनभर इंतजार करने के बाद भी जब नंबर नहीं आता, तो मजबूरी में उन्हें अपनी गाड़ी में ही रात बितानी पड़ती है। केंगेरी, यशवंतपुर, इंदिरानगर और आसपास के इलाकों में देर रात तक ऑटो की कतारें देखी जा सकती हैं।

एक चालक ने बताया, “सुबह से लाइन में लगा हूं, लेकिन शाम तक भी गैस मिलने की कोई गारंटी नहीं। घर जाने के लिए भी सोच रहा हूं कि गैस बचाकर रखूं या यहीं रुक जाऊं।” ऐसे हालात में कई लोग खाना तक छोड़कर सिर्फ अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

स्थिति को और गंभीर बना रही है सीमित आपूर्ति। कई पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगे हैं, जबकि कुछ जगहों पर तय सीमा से ज्यादा गैस नहीं दी जा रही। इससे कतारें लगातार लंबी होती जा रही हैं। कुछ जगहों पर तो लाइन एक किलोमीटर तक पहुंच गई है।

कीमतों में भी भारी अंतर देखने को मिल रहा है। जहां सरकारी दर अपेक्षाकृत कम है, वहीं कुछ निजी पंपों पर ज्यादा कीमत वसूली जा रही है। चालकों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें महंगे दाम पर गैस खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

ऑटो यूनियनों के मुताबिक, इस संकट का असर शहर के करीब आधे से ज्यादा चालकों पर पड़ चुका है। रोज़ कमाने-खाने वाले इन लोगों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई चालकों ने EMI, किराया और घर खर्च को लेकर चिंता जताई है।

इस पूरे संकट की जड़ें अंतरराष्ट्रीय हालात से जुड़ी बताई जा रही हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण LPG की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब भारत के शहरों में साफ दिख रहा है। हालांकि सरकार की ओर से स्थिति सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात अभी भी काबू में नहीं दिख रहे।

ऑटो यूनियन अब सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन या हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं। बेंगलुरु की सड़कों पर खड़ी ऑटो और उनमें रात गुजारते चालक यही बता रहे हैं कि यह सिर्फ ईंधन का संकट नहीं, बल्कि मेहनतकश आदमी की जिंदगी पर पड़ा सीधा असर है।

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