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ओम बिरला के खिलाफ 119 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ अविश्वास प्रस्ताव पेश, संसद के दुरुपयोग का आरोप

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026

संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार बढ़ते टकराव के बीच विपक्ष ने अब एक निर्णायक और अभूतपूर्व कदम उठा लिया है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का औपचारिक नोटिस सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसे लोकसभा सचिवालय और लोकसभा महासचिव को सौंपा गया। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही निष्पक्ष रूप से संचालित करने के बजाय बार-बार सत्ता पक्ष के हित में निर्णय लिए और संसद को बहस के मंच के बजाय सरकार का औज़ार बना दिया।

विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष का पद संविधान द्वारा प्रदत्त एक निष्पक्ष और गरिमामय संस्था है, जिसका दायित्व सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखना है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह संतुलन पूरी तरह टूटता हुआ दिखाई दे रहा है। इसी पृष्ठभूमि में अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।

“नेता प्रतिपक्ष की आवाज़ दबाई गई”

अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस में सबसे गंभीर आरोप यह है कि राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, को बार-बार सदन में बोलने से रोका गया। नोटिस के अनुसार 2 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। विपक्ष का दावा है कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक नियमित प्रक्रिया बन चुकी है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को लगभग हर महत्वपूर्ण अवसर पर बोलने से वंचित किया जाता है।

विपक्ष का कहना है कि संसद में बोलने का अधिकार किसी अध्यक्ष की कृपा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। जब इसी अधिकार को योजनाबद्ध तरीके से सीमित किया जाए, तो यह पूरे संसदीय लोकतंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

“विपक्ष पर कार्रवाई, सत्ता पक्ष को छूट”

नोटिस में 3 फरवरी 2025 की उस घटना का भी उल्लेख किया गया है, जब आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि यह निलंबन अनुशासनहीनता के कारण नहीं, बल्कि सरकार से सवाल पूछने की कीमत थी।

इसके विपरीत, 4 फरवरी 2025 को सत्ताधारी दल के एक सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर व्यक्तिगत और आपत्तिजनक हमले करने की अनुमति दी गई। विपक्ष का कहना है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उस सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि वह पहले भी ऐसे आचरण के लिए जाना जाता रहा है। इससे यह संदेश गया कि नियम विपक्ष के लिए अलग और सत्ता पक्ष के लिए अलग हैं।

“स्पीकर की कुर्सी लोकतंत्र की रीढ़ है”

विपक्षी दलों ने अपने नोटिस में कहा है कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी केवल एक संवैधानिक पद नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है। यदि वही कुर्सी निष्पक्षता खो दे, तो संसद बहस और संवाद का मंच नहीं रह जाती, बल्कि बहुमत की ताकत का प्रदर्शन बन जाती है।

नोटिस में साफ शब्दों में कहा गया है कि स्पीकर का लगातार एकतरफा रवैया संसद की संस्थागत विश्वसनीयता को कमजोर कर रहा है और करोड़ों मतदाताओं की आवाज़ को अप्रत्यक्ष रूप से दबा रहा है।

119 सांसदों का समर्थन: विपक्ष की एकजुटता का संकेत

इस अविश्वास प्रस्ताव पर 119 सांसदों के हस्ताक्षर को विपक्ष अपनी एकजुटता और गंभीरता का प्रमाण बता रहा है। हालांकि संख्याबल के लिहाज़ से प्रस्ताव का पारित होना फिलहाल कठिन माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह कदम सत्ता को चेतावनी देने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

आगे की राजनीति और संसद का भविष्य

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्पीकर कार्यालय और सरकार इस चुनौती का जवाब कैसे देती है। यह अविश्वास प्रस्ताव केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि संसद के मौजूदा संचालन और लोकतांत्रिक संतुलन पर सीधा सवाल है। इतना तय है कि स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस ने संसद के कामकाज, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक स्वास्थ्य पर देशव्यापी बहस को और तेज कर दिया है।

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