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नवनियुक्त सुप्रीम कोर्ट जजों का सम्मान, न्यायपालिका और बार के रिश्तों को नई ऊँचाई

राजधानी में सोमवार की शाम न्यायपालिका और विधि जगत के सबसे प्रतिष्ठित चेहरों का दुर्लभ संगम देखने को मिला। ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित भव्य समारोह में सुप्रीम कोर्ट के नवनियुक्त जजों का सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम न सिर्फ औपचारिकता का प्रतीक था, बल्कि भारत की न्याय प्रणाली की मजबूती, पारदर्शिता और न्याय तक सरल पहुँच की साझा प्रतिबद्धता का उत्सव भी बन गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अरjun Ram Meghwal की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष महत्व दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नवनियुक्त जज न्यायपालिका में नई ऊर्जा, व्यापक दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण की मजबूत इच्छा लेकर आते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में उच्चतम न्यायालय न्यायिक सुधारों और त्वरित न्याय की दिशा में और भी प्रभावी भूमिका निभाएगा।

इस सम्मान समारोह के केंद्र में रहे सुप्रीम कोर्ट के नए जज—जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस आलोक आराधे, और जस्टिस विपुल मनुभाई पंछोली—जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का आधार है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और जनता का भरोसा बनाए रखना उनका सर्वोपरि दायित्व होगा।

इस अवसर पर देश के शीर्ष विधि अधिकारियों और संसदीय प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विधि विशेषज्ञ और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ जूरिस्ट्स के अध्यक्ष डॉ. आदिश सी. अग्रवाल, राज्यसभा सांसद पी. विल्सन और वरिष्ठ वकील-सांसद विवेक टंखा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

उन्होंने अपने वक्तव्य में नए जजों को बधाई देते हुए कहा कि न्यायपालिका में उनका योगदान देश की संवैधानिक संरचना को और सशक्त बनाएगा।

कार्यक्रम का संचालन और औपचारिक घोषणा ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ जूरिस्ट्स के अध्यक्ष डॉ. आदिश सी. अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उन मूल्यों का सम्मान है जिन पर भारतीय न्यायपालिका टिकी है—निष्ठा, निष्पक्षता और न्याय की अबाध प्रतिबद्धता।

कार्यक्रम सौहार्द और सम्मान के वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें कानून जगत से जुड़े वरिष्ठ और युवा दोनों ही प्रतिभाओं की उपस्थिति ने इसे विशेष बना दिया। यह आयोजन इस बात का संकेत भी था कि भारत की न्याय व्यवस्था आने वाले समय में और अधिक मजबूत, संवेदनशील और जनता के प्रति जवाबदेह होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

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