राष्ट्रीय/ रक्षा एवं कूटनीति | काव्या अग्रवाल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/पेरिस | 12 जून 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा से पहले भारत और फ्रांस के रणनीतिक रिश्तों को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है। फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ भविष्य में होने वाला रक्षा सहयोग, विशेष रूप से भारतीय वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा, पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ की भावना और समान भागीदारी के मॉडल पर आधारित होगा। यह संकेत केवल एक रक्षा सौदे तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि भारत-फ्रांस संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार फ्रांस अब भारत को केवल एक ग्राहक के रूप में नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन में एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। यही कारण है कि प्रस्तावित राफेल परियोजना को पहले के रक्षा सौदों की तुलना में अलग ढंग से तैयार किया जा रहा है। इसमें तकनीक हस्तांतरण, भारत में विनिर्माण, स्थानीय उद्योगों की भागीदारी और रोजगार सृजन को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है। यदि यह योजना मूर्त रूप लेती है, तो भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
भारत और फ्रांस के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोधी साझेदारी, अंतरिक्ष कार्यक्रम और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ विश्वास का मजबूत आधार तैयार किया है। राफेल विमानों की पिछली खेप ने भारतीय वायुसेना की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की थी और अब 114 नए लड़ाकू विमानों की संभावित परियोजना को भारतीय रक्षा आधुनिकीकरण की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक माना जा रहा है।
फ्रांसीसी सूत्रों ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत के साथ सहयोग बढ़ने की संभावना व्यक्त की है। उनका मानना है कि भारत में हाल ही में किए गए विधायी और नीतिगत सुधारों से भविष्य में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति मिल सकती है। विशेष रूप से जैतापुर परमाणु परियोजना को लेकर दोनों देशों के बीच सकारात्मक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन India’ मॉडल के तहत होने वाला कोई भी बड़ा समझौता केवल सैन्य शक्ति को मजबूत नहीं करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को उन्नत तकनीक, उत्पादन क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और फ्रांस की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और आर्थिक विकास के नए अवसरों का भी संकेत देती है। यदि प्रस्तावित राफेल सौदा ‘मेक इन इंडिया’ मॉडल के साथ आगे बढ़ता है, तो यह भारत-फ्रांस संबंधों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और फ्रांस के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उभरते संबंधों के बीच यह संदेश स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में दोनों देश केवल रक्षा खरीददार और विक्रेता नहीं, बल्कि साझा हितों और साझा विकास के साझेदार के रूप में दुनिया के सामने नई मिसाल पेश कर सकते हैं।




