राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय / व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/काठमांडू | 23 अप्रैल 2026
100 रुपये की सीमा ने बढ़ाया तनाव, सीमा पर रहने वालों की मुश्किलें बढ़ीं
भारत और Nepal के बीच खुले बॉर्डर पर एक नया विवाद सामने आया है। नेपाल सरकार के एक नए कस्टम नियम ने सीमा पर रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। इस मुद्दे पर अब Ministry of External Affairs ने भी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वह पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
दरअसल, नेपाल ने हाल ही में एक नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया है, जिसके तहत भारत से आने वाले लोग अगर 100 नेपाली रुपये से ज्यादा कीमत का सामान लेकर आते हैं, तो उन्हें कस्टम ड्यूटी देनी होगी। पहले यह नियम कागजों तक सीमित था, लेकिन अब बॉर्डर पर इसकी सख्ती से जांच की जा रही है। यही वजह है कि सीमा के आसपास रहने वाले लोगों में नाराजगी तेजी से बढ़ी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने इस मामले पर कहा कि भारत को इस नियम के लागू होने की जानकारी है। उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार का मकसद गैरकानूनी व्यापार और तस्करी पर रोक लगाना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आम लोग जो अपने घर के इस्तेमाल के लिए सामान ला रहे हैं, उन्हें रोकने का इरादा नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे थोड़ी अलग नजर आ रही है।
सीमा से जुड़े इलाकों, खासकर तराई क्षेत्र में रहने वाले लोग लंबे समय से भारत और नेपाल के बीच बिना किसी बड़ी रोक-टोक के आवाजाही करते रहे हैं। लोग रोजमर्रा की जरूरत का सामान—जैसे चावल, चीनी, कपड़े और घरेलू चीजें—आसानी से एक-दूसरे देश से खरीदते रहे हैं। लेकिन अब नए नियम के कारण हर छोटे सामान की जांच हो रही है, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। मधेसी युवाओं ने सड़कों पर उतरकर इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई। काठमांडू के मशहूर Maitighar Mandala पर लोगों ने पोस्टर और नारे लगाकर सरकार से इस नियम को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नियम गरीब और सीमावर्ती लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहा है।
स्थानीय नेताओं और संगठनों ने भी इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराने सामाजिक और आर्थिक रिश्तों पर असर पड़ेगा। बॉर्डर के दोनों तरफ रहने वाले परिवारों के बीच रोज का संपर्क और व्यापार अब मुश्किल होता जा रहा है। भारत ने संतुलित रुख अपनाया है और सीधे तौर पर कोई सख्त टिप्पणी नहीं की है। लेकिन साफ है कि यह मामला दोनों देशों के रिश्तों के लिए संवेदनशील बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नेपाल सरकार इस नियम में कोई ढील देती है या नहीं, और क्या दोनों देशों के बीच बातचीत से इस समस्या का हल निकल पाता है।




