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नेपाल में कुदरत का कहर: 547 की मौत, 977 लापता; फिर बाढ़ का खतरा

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 28 अगस्त 2026

नेपाल में कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठा है। पहाड़ों से अचानक उतरे पानी, मलबे और चट्टानों के सैलाब ने कई बस्तियों को तबाह कर दिया। कहीं पूरा घर मिट्टी में दब गया तो कहीं देखते ही देखते सड़क और पुल पानी में बह गए। कई परिवारों ने अपने सामने अपनों को खो दिया और सैकड़ों परिवार आज भी इस इंतजार में हैं कि शायद उनका कोई अपना जिंदा लौट आए।

नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 547 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। करीब 1,473 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि दूरदराज के कई इलाकों में राहत दल अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं, इसलिए आने वाले समय में मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के पास ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इसके बाद पानी, बर्फ, मिट्टी, चट्टानों और मलबे का ऐसा तेज बहाव नीचे की ओर आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पहाड़ी नदियों का पानी अचानक उफान पर आ गया और रास्ते में आने वाली बस्तियों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया।

कुछ ही पलों में बदल गई जिंदगी

इस आपदा की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जो आज अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और बचाव केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।

किसी की पत्नी लापता है, किसी का बेटा, किसी का पिता तो किसी का पूरा परिवार ही पानी के साथ बह गया। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें यह भी पता नहीं कि उनका घर अब कहां था। चारों तरफ मिट्टी, मलबा और टूटी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं।

बचाव केंद्रों में पहुंच रहे लोगों की आंखों में अपनों को खोजने की उम्मीद और डर दोनों दिखाई दे रहे हैं। अस्पतालों में परिवार अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें और पहचान संबंधी जानकारी लेकर पहुंच रहे हैं। कई शव इतनी दूर तक बहकर चले गए हैं कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।

एक मां अपनी बेटी को खोज रही है, कोई पति अपनी पत्नी का इंतजार कर रहा है और कई बच्चे अपने माता-पिता की राह देख रहे हैं। यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे कठिन समय बन गया है।

अभी टला नहीं है खतरा

सबसे चिंता की बात यह है कि पहली तबाही के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भूस्खलन के कारण एक बैरियर झील बन गई है। इसमें लगातार पानी जमा हो रहा है। शुक्रवार को झील का पानी बढ़ने और ओवरफ्लो होने के बाद अधिकारियों को नई बाढ़ की आशंका हुई। कुछ समय के लिए बचाव अभियान भी रोकना पड़ा।

नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक दो झीलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनका कहना है कि जब तक दोनों झीलें पूरी तरह खाली नहीं हो जातीं, आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रह सकता है।

बाद में पानी का बहाव कम होने पर नेपाल और चीन में बचाव अभियान फिर शुरू किया गया। लेकिन राहतकर्मी अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। भारी बारिश और पहाड़ी इलाकों में लगातार बदलते मौसम के कारण हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है।

85 भारतीयों समेत 121 विदेशी सुरक्षित

इस भयावह आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक अब तक 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी और नौ दक्षिण कोरियाई नागरिक शामिल हैं।

कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय तीर्थयात्री भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंस गए थे। सिक्किम के आठ तीर्थयात्रियों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। अधिकारियों के मुताबिक सभी आठों सुरक्षित हैं।

भारत सरकार भी नेपाल और चीन में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी मदद के लिए लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और मदद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

सुरंग में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

आपदा के बीच रासुवा जिले में एक हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना ने बड़ा अभियान चलाया है।

सुरंग तक पहुंचना आसान नहीं है। चारों तरफ मलबा जमा है और कई रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं। सेना के जवान बेहद मुश्किल परिस्थितियों में अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि अन्य लोगों की तलाश जारी है।

कई इलाकों में सड़कें और पुल पूरी तरह बह चुके हैं। ऐसे स्थानों तक जमीन के रास्ते पहुंचना संभव नहीं है। इसलिए हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

नदी किनारे शवों की तलाश

बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा और शव भी बहाकर ले गया है। नेपाल के कई निचले जिलों में नदी किनारे शव मिलने की खबरें सामने आई हैं।

सबसे बड़ी समस्या उनकी पहचान को लेकर है। कई शवों की हालत बेहद खराब है। अस्पतालों के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ रही है। प्रशासन को शवों को रखने के लिए वैकल्पिक सरकारी इमारतों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

हर बरामद शव के साथ किसी परिवार की उम्मीद टूट रही है। लेकिन दूसरी तरफ उन परिवारों के लिए यह जरूरी भी है, जो कई दिनों से अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।

93 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

रेड क्रॉस के शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस आपदा से करीब 93 हजार लोग प्रभावित हुए हैं।

कई इलाकों में बिजली नहीं है। मोबाइल नेटवर्क बंद है। सड़कें और पुल बह गए हैं। हजारों लोग अपने घरों से दूर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। जिनके घर बच गए हैं, वे भी भविष्य को लेकर डरे हुए हैं क्योंकि उन्हें नहीं पता कि अगली बारिश क्या लेकर आएगी।

दुर्गम पहाड़ी इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है। कुछ स्थानों पर लोगों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता हेलीकॉप्टर ही बचा है।

रेड क्रॉस ने इस आपदा के मानवीय असर को बेहद गंभीर बताया है। हजारों लोगों ने न सिर्फ अपना घर और सामान खोया है, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को भी खोया है। इस त्रासदी का मानसिक और भावनात्मक असर लंबे समय तक लोगों के साथ रहेगा।

प्रधानमंत्री और मंत्रियों ने दिया एक महीने का वेतन

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और उनके मंत्रिमंडल ने राहत कार्यों में योगदान के लिए अपने एक महीने का वेतन आपदा राहत कोष में देने का फैसला किया है।

सरकार ने बाढ़ से प्रभावित लोगों और कारोबारियों के लिए राहत एवं पुनर्वास पैकेज तैयार करने का भी निर्देश दिया है। इसके जरिए उन परिवारों और कारोबारियों की मदद करने की कोशिश की जाएगी, जिन्हें इस आपदा में भारी नुकसान हुआ है।

तिब्बत में भी भारी तबाही

नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा का गंभीर असर पड़ा है। चीनी अधिकारियों के अनुसार अब तक 5 लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है।

तिब्बत के प्रभावित इलाके में चीनी बचाव दल पहुंच चुके हैं। बचाव अभियान को जमीन, पानी और हवा—तीनों माध्यमों से चलाया जा रहा है। कुछ बचावकर्मी पैदल पहाड़ों को पार कर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, जबकि हेलीकॉप्टर और ड्रोन की भी मदद ली जा रही है।

चीन ने नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में सहायता की पेशकश भी की है।

तबाही का पूरा आंकड़ा अभी सामने नहीं

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। कई इलाके ऐसे हैं जहां बचाव दलों की पहुंच नहीं हो सकी है। इसलिए इस त्रासदी की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।

सबसे बड़ी चुनौती अब उन लोगों को तलाशना है, जिनके परिवार उनकी राह देख रहे हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ रही हैं।

नेपाल की पहाड़ियों में आई यह बाढ़ अपने पीछे सिर्फ टूटी सड़कें, बहते पुल और मलबे में बदले घर नहीं छोड़ गई है। यह हजारों परिवारों के जीवन में ऐसा खालीपन छोड़ गई है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। पूरा देश एक उम्मीद के सहारे बचाव दलों की ओर देख रहा है—शायद मलबे के नीचे, किसी सुरंग में या किसी दूर पहाड़ी इलाके में कोई जिंदगी अब भी बची हो।राहत और बचाव अभियान जारी है। लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

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