अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 28 अगस्त 2026
सिचुआन में अचानक कांपी धरती
चीन के सिचुआन प्रांत में शुक्रवार को अचानक आए 5.1 तीव्रता के भूकंप से लोगों में दहशत फैल गई। चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के अनुसार भूकंप का केंद्र नेइजियांग क्षेत्र के लॉन्गचांग शहर में दर्ज किया गया। धरती के अचानक हिलने से कई इलाकों में लोगों को तेज झटके महसूस हुए और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग सुरक्षा के लिए घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार भूकंप से बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों से जानकारी जुटाई जा रही है।
भूकंप के बाद लोगों में डर, प्रशासन अलर्ट
भूकंप के बाद सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर होती है कि कहीं कमजोर या पुरानी इमारतों को नुकसान तो नहीं पहुंचा। 5.1 तीव्रता का भूकंप इतना शक्तिशाली हो सकता है कि उसके झटके आसपास के कई इलाकों में महसूस किए जाएं, हालांकि नुकसान की वास्तविक स्थिति भूकंप की गहराई, केंद्र से दूरी और स्थानीय निर्माण की मजबूती पर निर्भर करती है। अधिकारियों की ओर से फिलहाल किसी बड़े हादसे या व्यापक तबाही की सूचना नहीं दी गई है। राहत की बात यह है कि शुरुआती जानकारी में बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन किसी भी संभावित आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों को लेकर सतर्क है।
सिचुआन पहले भी झेल चुका है बड़े भूकंपों की मार
सिचुआन चीन का ऐसा क्षेत्र है जहां अतीत में भी कई बड़े और विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। इस वजह से यहां भूकंप आने के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं। शुक्रवार को आए भूकंप के बाद भी स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है और यह देखा जा रहा है कि कहीं किसी इलाके में मकानों, सड़कों या अन्य ढांचों को नुकसान तो नहीं पहुंचा। दूरदराज के क्षेत्रों से पूरी जानकारी आने में समय लग सकता है, इसलिए अधिकारियों की निगरानी जारी है।
नेपाल में भी जारी है भारी तबाही
चीन में भूकंप की यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब चीन का पड़ोसी देश नेपाल एक बेहद भयावह प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है। नेपाल में बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं और सेना, पुलिस तथा राहत दल लगातार मलबे और नदियों के किनारे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई सड़कें और पुल बह चुके हैं, जिससे दूरदराज के प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर फिर बाढ़ का खतरा
पहली बाढ़ की तबाही के बाद अब नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और खतरा पैदा हो गया है। भूस्खलन के कारण बनी एक बैरियर झील में पानी बढ़ने के बाद उसके ओवरफ्लो होने की खबर सामने आई, जिससे दूसरी बार अचानक बाढ़ आने की आशंका पैदा हुई। इस खतरे को देखते हुए कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। बाद में पानी का स्तर और बहाव नियंत्रित होने पर बचाव अभियान फिर शुरू किया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में बनी झीलों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जब तक पानी पूरी तरह सुरक्षित तरीके से निकल नहीं जाता, तब तक खतरा बना रह सकता है।
नेपाल में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा
नेपाल में जारी फ्लैश फ्लड ने जिस तरह की तबाही मचाई है, उसने पूरे देश को हिला दिया है। नेपाल पुलिस के अनुसार शुक्रवार तक 547 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। कई शव तेज बहाव के साथ दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच गए हैं, जिससे उनकी पहचान करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और पहचान केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। किसी को अपने माता-पिता की चिंता है, किसी को पति या पत्नी की, तो किसी को अपने बच्चों और रिश्तेदारों की कोई खबर नहीं मिल पा रही है। संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क टूट जाने के कारण लोगों की बेचैनी और बढ़ गई है।
121 विदेशी नागरिकों को बचाया गया, 85 भारतीय शामिल
नेपाल में फंसे विदेशी नागरिकों को निकालने के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार अब तक 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 85 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा चीनी और दक्षिण कोरियाई नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी इस आपदा की चपेट में आए। भारत सरकार नेपाल और चीन में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय दूतावास तथा अन्य एजेंसियां प्रभावित लोगों की मदद में जुटी हैं।
सुरंग में फंसे लोगों को बचाने के लिए सेना का अभियान
नेपाल के रासुवा जिले में एक हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में भी कई लोग फंस गए थे। नेपाली सेना ने सुरंग तक पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया और कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। लेकिन सुरंग के अंदर भारी मात्रा में मलबा जमा होने और प्रवेश मार्ग तक पहुंचने में मुश्किल के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बचावकर्मी लगातार उम्मीद के साथ मलबे को हटाने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे अभियान में हर गुजरता घंटा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार अपने प्रियजनों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
93 हजार से ज्यादा लोगों पर आपदा का असर
रेड क्रॉस के शुरुआती अनुमान के अनुसार नेपाल की इस आपदा से करीब 93 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें, पुल, बिजली और मोबाइल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क तक टूट गया है। जहां सड़कें बह गई हैं, वहां राहत दलों को हेलीकॉप्टर या कठिन पहाड़ी रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। भारी बारिश की आशंका ने भी राहत और बचाव अभियान को मुश्किल बना दिया है। प्रभावित लोगों के सामने सिर्फ घर और सामान खोने की समस्या नहीं है, बल्कि उनके सामने भोजन, पानी, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय की तत्काल जरूरत भी है।
नेपाल सरकार ने राहत के लिए उठाया कदम
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने एक महीने का वेतन प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में देने का फैसला किया है। सरकार ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों तथा कारोबारियों के लिए राहत और पुनर्वास पैकेज तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। दूसरी ओर चीन ने भी नेपाल की राहत और बचाव कोशिशों में मदद की पेशकश की है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा से भारी नुकसान हुआ है, जहां पांच लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
प्राकृतिक आपदाओं के बीच पूरा क्षेत्र चिंतित
एक तरफ नेपाल में ग्लेशियर, भूस्खलन और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, तो दूसरी तरफ चीन के सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया है। हालांकि सिचुआन का भूकंप और नेपाल-तिब्बत की बाढ़ अलग-अलग प्राकृतिक घटनाएं हैं और इनके बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल सिचुआन में प्रशासन भूकंप के बाद की स्थिति पर नजर रख रहा है, जबकि नेपाल और तिब्बत में हजारों राहतकर्मी जिंदगी बचाने की कोशिश में जुटे हैं। नेपाल की त्रासदी में सबसे बड़ी उम्मीद उन लोगों को सुरक्षित खोज निकालने की है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। संकट की इस घड़ी में हर बचाया गया इंसान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि किसी परिवार की पूरी दुनिया है।




