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“मेरे बेटे की लाश कुत्ते नोंचकर खा गए…” — एक पिता का दर्द, जिसने अपनी दुनिया खो दी और अब लावारिस शवों को देता है सम्मान

एबीसी नेशनल न्यूज | 15 फरवरी 2026

कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें पढ़ते ही दिल कांप उठता है। यह कहानी एक ऐसे पिता की है, जिसने अपने बेटे को खो दिया—लेकिन उससे भी ज्यादा दर्दनाक यह कि उसे अपने बच्चे का अंतिम दर्शन तक नसीब नहीं हुआ।

वह बताते हैं, “मेरा बेटा लापता हुआ था। हम उसे ढूंढते रहे… दिन-रात तलाश की। लेकिन जब खबर मिली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसकी लाश भी पूरी नहीं मिली। कुत्ते उसे नोंचकर खा गए थे।” यह कहते हुए उनकी आवाज भर्रा जाती है।

यह सिर्फ एक मौत नहीं थी, यह एक पिता के जीवन की पूरी दुनिया उजड़ जाने जैसा था। बेटे की यादें, उसकी हंसी, उसके सपने—सब कुछ जैसे एक झटके में खत्म हो गया। अंतिम संस्कार तक ठीक से न कर पाने का दर्द उन्हें भीतर से तोड़ गया।

लेकिन इसी असहनीय पीड़ा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने ठान लिया कि जो दर्द उन्होंने सहा, वह किसी और परिवार को न झेलना पड़े। आज वे लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। सड़कों, अस्पतालों या रेलवे ट्रैक के पास मिलने वाली अनजान लाशों को वे सम्मान के साथ विदाई देते हैं।

वे कहते हैं, “जब मुझे अपने बेटे को कंधा देने का मौका नहीं मिला, तो अब मैं हर उस लाश को अपना बेटा समझकर विदा करता हूं।” उनकी आंखों में आंसू होते हैं, लेकिन चेहरे पर एक अजीब-सी दृढ़ता भी दिखती है।

समाज में जहां अक्सर लोग लावारिस शवों से दूरी बना लेते हैं, वहीं यह पिता उन्हें सम्मान देने का काम कर रहा है। वह पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करता है, ताकि किसी की मौत बेनाम न रहे।

यह कहानी केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल भी है। एक पिता जिसने अपना सब कुछ खो दिया, उसने अपने दर्द को सेवा में बदल दिया। शायद यही जीवन का सबसे बड़ा साहस है—अपनी टूटन से किसी और के लिए सहारा बन जाना।

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