राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026
छात्र आंदोलन के दौरान मुंबई में पुलिस वैन रोकने के बाद चर्चा में आईं 27 वर्षीय मॉडल रिया अहीर ने अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने अपने साथ कथित तौर पर हो रहे उत्पीड़न और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर खुलकर बात की है। रिया ने दावा किया कि उन्होंने 27 जुलाई को शिवाजी पार्क के पास पुलिस की एक वैन इसलिए रोकी थी क्योंकि उसमें करीब 20 युवाओं को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेकर ले जाया जा रहा था। उनका कहना है कि छात्रों के पक्ष में खड़े होने के बाद से उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अलग-अलग नैरेटिव चलाए जा रहे हैं और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। रिया का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की, लेकिन 5 अगस्त तक उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं हुई थी।
राहुल गांधी के साथ छात्र आंदोलन से जुड़े युवाओं की बातचीत के दौरान रिया ने कहा, “मैं वही लड़की हूं, जिसने मुंबई में पुलिस की वैन को रोका था और अब मेरे बारे में कई नैरेटिव चलाए जा रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि उन्होंने करीब 20 युवाओं को कथित गैरकानूनी हिरासत से बचाने के लिए हस्तक्षेप किया था। रिया के मुताबिक इसके बाद उन्हें निशाना बनाया जाने लगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हैरेस किया जाना अपने आप में गंभीर मामला है और इसी को लेकर उन्होंने 27 जुलाई को पुलिस में शिकायत की थी। रिया ने सवाल उठाया कि कई दिन गुजरने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई।
इस पूरे विवाद के बीच रिया ने एक भावनात्मक बात भी कही। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं के लिए वह उस दिन पुलिस के सामने खड़ी हुई थीं, आज वही युवा उनके साथ खड़े हैं। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर उनके बारे में क्या कहा जा रहा है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस दिन छात्रों के साथ क्या हो रहा था और उन्होंने पुलिस वैन रोकने का फैसला क्यों किया। रिया ने अपने कदम को छात्रों के अधिकारों के पक्ष में उठाया गया कदम बताया।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि NEET और दूसरे छात्र आंदोलनों से जुड़े कई युवाओं ने हाल में राहुल गांधी के सामने पुलिस कार्रवाई, हिरासत, कथित मारपीट और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने इन युवाओं के मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखने को साहस का काम बताया। उनका कहना था कि उत्पीड़न और धमकियों के आरोपों के बावजूद यदि युवा सार्वजनिक रूप से अपने अनुभव बता रहे हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए और आरोपों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राजनीतिक जिम्मेदारी का सवाल भी उठाया है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि गृह मंत्री को ऐसी कार्रवाई की जानकारी नहीं थी तो सरकार को बताना चाहिए कि कार्रवाई किस स्तर पर और किसके निर्देश पर हुई, और यदि जानकारी थी तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक हैं और संबंधित पुलिस तथा सरकार का विस्तृत पक्ष भी किसी अंतिम निष्कर्ष के लिए महत्वपूर्ण होगा।
रिया अहीर का मामला अब छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर एक दूसरा महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है—क्या किसी नागरिक द्वारा पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने या हिरासत में लिए जा रहे प्रदर्शनकारियों के पक्ष में खड़े होने के बाद उसे ऑनलाइन निशाना बनाया जा सकता है? साथ ही यदि रिया की शिकायत पुलिस को मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई, FIR दर्ज क्यों नहीं हुई या शिकायत में ऐसा क्या था जिसके कारण FIR दर्ज करना आवश्यक नहीं समझा गया—इन सवालों पर संबंधित पुलिस का आधिकारिक जवाब तस्वीर साफ कर सकता है।
सोशल मीडिया पर रिया को लेकर चल रही बहस के बीच यह अंतर भी जरूरी है कि किसी पक्ष के दावे को जांच से पहले स्थापित तथ्य न माना जाए। रिया का करीब 20 छात्रों को कथित गैरकानूनी हिरासत से बचाने, अपने खिलाफ उत्पीड़न और शिकायत के बावजूद FIR न होने का बयान उनका दावा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
लेकिन एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतना सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि यदि कोई महिला सार्वजनिक रूप से कह रही है कि उसे अपने नागरिक हस्तक्षेप के बाद परेशान किया गया और उसने बाकायदा पुलिस में शिकायत दी, तो उसकी शिकायत का क्या हुआ? रिया अहीर के आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला सोशल मीडिया की ट्रोलिंग नहीं बल्कि तथ्य, पुलिस रिकॉर्ड और कानून को करना चाहिए।




