राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/ बेंगलुरू | 8 अक्टूबर 2026
मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर देश की सियासत में टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर INDIA ब्लॉक के सांसदों का दिल्ली में प्रदर्शन, राहुल गांधी का इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान, बेंगलुरु में SIR से कथित तौर पर प्रभावित लोगों के लिए ‘People’s Tribunal’ और अब 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA, NSUI, यूथ कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल तथा विपक्षी दलों के बड़े जमावड़े की तैयारी ने पूरे विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है और अब SIR पर पूरी तरह महासंग्राम शुरू हो चुका है जिसमें 10 अक्टूबर को दिखेगा विशाल जनआंदोलन।
विपक्षी दलों और आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसे स्पष्ट कारण, आपत्ति दर्ज कराने का अवसर और नाम बहाल कराने की प्रभावी व्यवस्था मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है। केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने गुरुवार को विपक्ष के प्रदर्शन को ‘हताशा’ से प्रेरित बताया और SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार कहा। चुनाव आयोग भी SIR और Form 6 से जुड़े विभिन्न दावों पर स्पष्टीकरण और फैक्ट-चेक जारी कर रहा है।
लेकिन सियासी टकराव थमने के बजाय और गहरा गया है।
राहुल गांधी का ऐलान—इस्तीफे तक नहीं रुकेगा आंदोलन
7 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक के सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य विपक्षी नेताओं को रास्ते में रोककर हिरासत में लिया।
इसके बाद राहुल गांधी ने साफ कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। विपक्ष का कहना है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए और पूरी प्रक्रिया जनता के सामने पारदर्शी तरीके से रखी जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को लेकर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज हर FIR उनके लिए ‘मेडल’ है। राहुल के मुताबिक उनके खिलाफ 45 FIR हैं और उनका लक्ष्य 100 FIR का है।
बुधवार की पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने गुरुवार को देशभर में ‘ब्लैक डे’ और प्रदर्शन का आह्वान किया। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार पर गंभीर आपत्ति जताई है।
हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और बिना अनुमति मार्च या प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।
INDIA ब्लॉक का दबाव जारी
8 अक्टूबर को भी विपक्ष ने अपना अभियान जारी रखा। INDIA ब्लॉक के नेताओं का कहना है कि यह केवल एक दिन का राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर लंबी लड़ाई है।
विपक्ष की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को लेकर उठे सवालों का जवाब, मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है।
विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय भी मांगा है। विपक्ष की ओर से 15 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अनुरोध किया गया था, जबकि सूत्रों के अनुसार 10 नेताओं को मिलने की अनुमति दी गई है। TMC प्रमुख ममता बनर्जी के भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की संभावना बताई गई है।
CJP का बड़ा ऐलान—लड़ाई सिर्फ इस्तीफे तक नहीं
इस पूरे आंदोलन में Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। CJP, AISA और अन्य छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है।
CJP की ओर से कहा गया है कि आंदोलन केवल किसी एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। संगठन का कहना है कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे भी देते हैं, तब भी चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग जारी रहेगी।
CJP मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनावी व्यवस्था में सुधार और CEC की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बदलाव की मांग उठा रहा है। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की मांग भी की है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
CJP ने लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने की अपील की है और आंदोलन को लंबा चलाने का संकेत दिया है।
10 अक्टूबर को बड़ा मोर्चा—AISA, नेहा बोरा, NSUI, यूथ कांग्रेस और कांग्रेस सेवा दल भी मैदान में
10 अक्टूबर का जंतर-मंतर आंदोलन अब केवल CJP का कार्यक्रम नहीं रहने वाला है। AISA, NSUI, यूथ कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के भी इसमें शामिल होने की तैयारी है।
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत छात्र संगठनों से जुड़े नेताओं ने SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर व्यापक लामबंदी की अपील की है। छात्र संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल युवाओं और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से भी जुड़ा है।
NSUI और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस सेवा दल की भागीदारी से आंदोलन में कांग्रेस के छात्र, युवा और संगठनात्मक ढांचे की मौजूदगी भी दिखाई दे सकती है।
विपक्षी दलों की ओर से भी अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की जा रही है।
यानी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA, NSUI, यूथ कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल और विपक्षी दलों का साझा राजनीतिक-सामाजिक जमावड़ा देखने को मिल सकता है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब, कथित रूप से हटाए गए नामों की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है।
बेंगलुरु में ‘People’s Tribunal’—SIR से प्रभावित लोगों की आवाज
दिल्ली के साथ बेंगलुरु भी SIR विरोधी गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन गया है। 8 अक्टूबर को फ्रीडम पार्क में ‘People’s Tribunal’ आयोजित किया जा रहा है।
अभिनेता प्रकाश राज ने इस कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही है। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और YouTuber ध्रुव राठी के भी कार्यक्रम में पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
आयोजकों के अनुसार, कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे लोग कार्यक्रम में अपनी शिकायतें और अनुभव सामने रखेंगे, जो दावा करते हैं कि SIR की प्रक्रिया के दौरान उनके मतदाता रिकॉर्ड प्रभावित हुए।
इस ‘People’s Tribunal’ का उद्देश्य ऐसे लोगों को सार्वजनिक मंच देना बताया गया है, ताकि उनकी शिकायतें और अनुभव राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकें।
कर्नाटक कांग्रेस ने भी गुरुवार को बेंगलुरु में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अलग प्रदर्शन किया। इससे राज्य में राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की गतिविधियां एक साथ तेज हो गई हैं।
विजयपुरा FIR ने बढ़ाई बहस
SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच कर्नाटक के विजयपुरा से भी एक मामला सामने आया है। पुलिस ने BJP से निष्कासित विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल के खिलाफ मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने के लिए कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार करने के आरोप में FIR दर्ज की है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। हालांकि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली से ओडिशा तक विरोध
SIR का विरोध अब दिल्ली और कर्नाटक से आगे बढ़ चुका है। ओडिशा में INDIA ब्लॉक से जुड़े दलों ने गुरुवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया। कई जिलों में दुकानें, पेट्रोल पंप और शिक्षण संस्थान बंद रहे तथा सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में भी CEC के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर समाजवादी पार्टी के पांच कार्यकर्ताओं और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति नारेबाजी की, पुतला जलाया और सड़क बाधित की।
इस तरह SIR को लेकर विरोध अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रूप ले रहा है।
सरकार का पलटवार
केंद्र सरकार की ओर से विपक्षी आंदोलन पर पलटवार किया गया है। केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है और वह ‘हताशा’ में प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया।
सरकार का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो रहा है और विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
विपक्ष इससे पूरी तरह असहमत है। उसका कहना है कि सवाल किसी पार्टी के राजनीतिक हित का नहीं, बल्कि मतदाता के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में विश्वास का है।
चुनाव आयोग के सामने भरोसे की सबसे बड़ी परीक्षा
पूरे विवाद का केंद्र अब मतदाता सूची की पारदर्शिता बन चुका है।
यदि किसी योग्य मतदाता का नाम हटता है तो उसे इसकी जानकारी, आपत्ति दर्ज करने का अवसर और प्रभावी सुधार प्रक्रिया मिलनी चाहिए—यही विपक्ष और आंदोलनकारी संगठनों का तर्क है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने स्पष्टीकरणों और फैक्ट-चेक के जरिए कई दावों का जवाब दे रहा है।
अब विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों पक्षों के दावों की वास्तविक तस्वीर आंकड़ों, दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर सामने आनी है।
10 अक्टूबर पर टिकी देश की नजर
अब सबसे ज्यादा निगाह 10 अक्टूबर पर है।
एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर अपना राजनीतिक अभियान आगे बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ CJP, AISA, नेहा बोरा, NSUI, यूथ कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल और अन्य विपक्षी संगठन जंतर-मंतर पर अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं।
CJP का कहना है कि आंदोलन केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।
बुधवार को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की हिरासत के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। अब 10 अक्टूबर का प्रदर्शन इस पूरे विवाद का अगला बड़ा पड़ाव बनने जा रहा है।
एक तरफ सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है, चुनाव आयोग अपने स्पष्टीकरण दे रहा है और दूसरी तरफ विपक्ष तथा आंदोलनकारी संगठन लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं।
अब असली सवाल यही है—SIR को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से मिलेगा या चुनाव आयोग पारदर्शी आंकड़ों और रिकॉर्ड के साथ जनता के सामने पूरी तस्वीर रखेगा?
दिल्ली से बेंगलुरु तक उठ रही आवाजें इसी सवाल को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही हैं। 8 अक्टूबर का ‘People’s Tribunal’ और 10 अक्टूबर का जंतर-मंतर प्रदर्शन अब इस पूरे विवाद के अगले बड़े पड़ाव बन चुके हैं।



