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यूपी में पटाखा फैक्ट्री का भीषण धमाका: 8 बच्चों समेत 11 की मौत, लाइसेंस निलंबित था फिर भी चल रहा था कारखाना

अपराध/ उत्तर प्रदेश | ABC NATIONAL NEWS | कौशांबी | 1 सितंबर 2026

धमाके ने उजाड़ दिए 11 परिवार

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार दोपहर पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने इलाके को दहला दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत के साथ आसपास के छह मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों के मुताबिक हादसे में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें आठ बच्चे शामिल हैं। चार साल का एक बच्चा भी इस भयावह हादसे का शिकार हुआ। हादसे के बाद घटनास्थल पर धुआं, मलबा और तबाही का मंजर दिखाई दिया।

खेतों के बीच घर में चल रही थी फैक्ट्री

हादसा कौशांबी और प्रयागराज जिलों की सीमा पर स्थित मनौरी गांव में हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पटाखा बनाने का काम कृषि क्षेत्र के बीच बने एक मकान से संचालित किया जा रहा था। विस्फोट के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और इलाके को सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस के अनुसार भवन के जिस हिस्से में कथित तौर पर अवैध गतिविधि चल रही थी, उसे गिराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

सबसे बड़ा सवाल: लाइसेंस निलंबित था, फिर उत्पादन कैसे जारी रहा?

पुलिस के अनुसार इस पटाखा निर्माण इकाई का मालिक नौशाद है और उसका लाइसेंस पहले से निलंबित था। इसके बावजूद कथित तौर पर वहां पटाखा निर्माण का काम जारी था। यही तथ्य अब प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि जब लाइसेंस निलंबित था तो फैक्ट्री में ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री के साथ काम कैसे चल रहा था और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।

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मालिक फरार, रिश्तेदार हिरासत में

कौशांबी के पुलिस अधीक्षक सत्य नारायण प्रजापति के मुताबिक फैक्ट्री मालिक नौशाद घटना के बाद फरार है। पुलिस ने उसके कुछ रिश्तेदारों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि निलंबित लाइसेंस के बावजूद निर्माण कार्य किसकी अनुमति या मिलीभगत से जारी था और फैक्ट्री में उस समय कितने लोग मौजूद थे।

एक धमाका और छह घर तबाह

विस्फोट का असर केवल फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहा। अधिकारियों के मुताबिक धमाके में फैक्ट्री की इमारत के अलावा छह अन्य मकान भी नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इससे हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। खेतों के बीच स्थित होने के बावजूद आसपास बने मकान इस विस्फोट की चपेट में आ गए और कई परिवारों पर अचानक आफत टूट पड़ी।

बच्चों की मौत ने बढ़ाई त्रासदी की गंभीरता

इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतकों में आठ बच्चे शामिल हैं। चार साल के बच्चे की मौत ने हादसे की भयावहता को और गहरा कर दिया है। पटाखा निर्माण जैसी अत्यधिक जोखिम वाली गतिविधि के बीच बच्चों की मौजूदगी और उनकी मौत यह सवाल भी उठाती है कि वहां सुरक्षा मानकों और काम करने वाले लोगों की उम्र को लेकर नियमों का कितना पालन किया जा रहा था।

अब जांच के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी है कि निलंबित लाइसेंस वाली इकाई में पटाखा निर्माण कैसे चलता रहा। जांच में फैक्ट्री की वास्तविक स्थिति, विस्फोटक सामग्री का भंडारण, सुरक्षा इंतजाम, भवन की वैधता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

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हादसे ने फिर खड़ा किया जवाबदेही का सवाल

कौशांबी की यह घटना एक बार फिर बताती है कि पटाखा निर्माण जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधियों में नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। 11 मौतें, आठ बच्चों की जान और कई मकानों की तबाही के बाद अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि धमाका कैसे हुआ, बल्कि यह भी है कि जिस इकाई का लाइसेंस निलंबित था, उसे चलने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी। पुलिस की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

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