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भारत-कनाडा संबंधों में बड़ा मोड़: यूरेनियम आपूर्ति समझौता, 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 3 मार्च 2026

भारत और कनाडा के रिश्तों में एक अहम बदलाव देखने को मिला है। दोनों देशों ने दीर्घकालीन यूरेनियम आपूर्ति का बड़ा समझौता किया है और तय किया है कि वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर यानी लगभग 4.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाएगा। यह फैसले कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान लिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच हुई बैठक के बाद कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

बीते कुछ सालों में दोनों देशों के संबंध तनाव से गुजरे थे। साल 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। भारत ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ गई थी। अब नई पहल को रिश्तों में सुधार और भरोसा बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले देश हैं और दोनों के बीच भरोसे और सहयोग की नई शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए को जल्द अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी कहा कि यह केवल पुराने रिश्तों की वापसी नहीं है, बल्कि आगे की मजबूत और नई साझेदारी की शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि साल 2026 के अंत तक व्यापार समझौता पूरा कर लिया जाएगा।

ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ यूरेनियम समझौता सबसे अहम माना जा रहा है। इससे भारत के परमाणु ऊर्जा उत्पादन को मजबूती मिलेगी। दोनों देशों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और नई परमाणु तकनीक में भी साथ काम करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही हरित ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात भी कही गई है। कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक बायोफ्यूल पहल से जुड़ने में भी रुचि दिखाई है।

रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला हुआ है। दोनों देशों ने भारत-कनाडा रक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति जताई है। इसमें समुद्री सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग में सहयोग शामिल होगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को लेकर भी साझा काम करने की बात कही गई है।

व्यापार और निवेश को लेकर दोनों देशों ने नई योजनाएं बनाई हैं। कनाडा के पेंशन फंड पहले से भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर चुके हैं। अब व्यापार में बाधाएं कम करने और निवेश के नए अवसर खोलने पर जोर दिया जाएगा। लक्ष्य है कि दशक के अंत तक दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना हो जाए।

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने के लिए कई फैसले हुए हैं। दोनों देशों की यूनिवर्सिटी मिलकर शोध और नवाचार पर काम करेंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर और सुपरकंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ेगी। कुछ कनाडाई विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस खोलने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

कृषि क्षेत्र में दाल और प्रोटीन से जुड़े उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत में एक ‘पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने का फैसला हुआ है। इसके अलावा सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आदिवासी समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

कुल मिलाकर, भारत और कनाडा ने अपने रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। पुराने विवादों के बाद यह समझौता दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि तय लक्ष्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और यह नई साझेदारी कितनी मजबूत बनती है।

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