राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 सितंबर 2026
दिल्ली की मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 33.1 लाख मतदाताओं की ऐसी सूची जारी की है, जिनके रिकॉर्ड में या तो कुछ “तार्किक विसंगतियां” मिली हैं या फिर उनके विवरण का पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया है। खास बात यह है कि इस सूची में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े राजनीतिक नाम भी शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और सांसद बांसुरी स्वराज के नाम भी इस सूची में बताए गए हैं। हालांकि, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सूची में नाम आना वोट खत्म होने या मतदाता सूची से नाम हटने का अंतिम फैसला नहीं है। फिलहाल इन मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन होना है और उसके बाद ही अंतिम सूची में उनके नाम को लेकर स्थिति साफ होगी।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 18 सितंबर को यह सूची सार्वजनिक की। इसमें उन मतदाताओं के नाम हैं जिनके विवरण की दोबारा जांच जरूरी मानी गई है। कुछ मामलों में मतदाता की जानकारी में ऐसी विसंगति मिली है जिसे निर्वाचन विभाग ने “तार्किक विसंगति” कहा है, जबकि कई मामलों में मौजूदा रिकॉर्ड का पिछले एसआईआर से मिलान नहीं हो पाया। आसान भाषा में समझें तो चुनाव अधिकारी पुराने और मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को आपस में जोड़कर देख रहे हैं। अगर पुराने रिकॉर्ड से नाम, पता या दूसरी जानकारी का मिलान नहीं हो पा रहा है, तो उस मतदाता को आगे सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए 33.1 लाख को गलत मतदाताओं की संख्या मानना अभी सही नहीं होगा। यह उन मतदाताओं की संख्या है जिनके रिकॉर्ड पर आगे जांच की जरूरत बताई गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नामों को लेकर हो रही है। रेखा गुप्ता इस समय दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं, जबकि अरविंद केजरीवाल लंबे समय तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे हैं। दोनों का नाम एक ही सत्यापन सूची में आने के बाद स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इनके रिकॉर्ड में ऐसी क्या बात सामने आई जिसे दोबारा जांच की जरूरत पड़ी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केजरीवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के रिकॉर्ड का पिछले एसआईआर से मिलान नहीं हो पाया है। वहीं रेखा गुप्ता का नाम भी 33.1 लाख मतदाताओं वाली सूची में शामिल है। लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि दोनों का मतदाता अधिकार खत्म हो गया है या उनके नाम गलत पाए गए हैं। अभी यह सत्यापन का मामला है।
इस सूची में कई दूसरे चर्चित नामों का होना भी ध्यान खींच रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के नाम भी इसमें बताए गए हैं। दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और सांसद बांसुरी स्वराज भी इस सूची में शामिल हैं। यानी जांच का दायरा केवल आम मतदाताओं तक सीमित नहीं है। लेकिन हर नाम के पीछे कारण अलग हो सकता है। किसी व्यक्ति का पता बदल गया हो सकता है, पुराने और नए रिकॉर्ड में अंतर हो सकता है या किसी दस्तावेज में दर्ज जानकारी अलग हो सकती है। इसलिए हर मामले का फैसला अलग-अलग रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद ही किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि 33.1 लाख लोगों के रिकॉर्ड में आखिर ऐसा क्या मिला? एसआईआर के दौरान निर्वाचन विभाग पुराने मतदाता रिकॉर्ड के साथ मौजूदा रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है। जहां विवरण आपस में नहीं जुड़ता या जानकारी में कोई असंगति दिखाई देती है, वहां सत्यापन जरूरी माना गया है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में यह प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों और शहरों से आकर बसते हैं। नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के कारण लोग लगातार घर बदलते हैं। किराये के मकान में रहने वाले लोगों का पता बदल सकता है, जबकि मतदाता सूची में पुराना पता दर्ज रह सकता है। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड का मिलान करना अपने आप में एक चुनौती है।
यही वजह है कि इस सूची को देखकर तुरंत यह कहना कि दिल्ली में 33.1 लाख गलत मतदाता मिल गए हैं, सही नहीं होगा। अभी यह जांच की सूची है, अंतिम निष्कर्ष नहीं। इन मतदाताओं के दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने मामलों में वास्तविक गलती है, कितने मामलों में केवल दस्तावेजी अंतर है और कितने रिकॉर्ड को सुधारने की जरूरत है। यह अंतर समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम होना लोकतांत्रिक अधिकार से सीधे जुड़ा हुआ है।
जिन लोगों का नाम इस सूची में आया है, उनके लिए अब सबसे जरूरी है कि वे अपने मतदाता रिकॉर्ड की जांच करें और अगर निर्वाचन विभाग की ओर से सत्यापन की जरूरत बताई गई है तो तय प्रक्रिया के तहत जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएं। अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज है या उसे गलत तरीके से जांच के दायरे में रखा गया है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रख सकता है। मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में दावा और आपत्ति का रास्ता इसलिए महत्वपूर्ण होता है ताकि वास्तविक मतदाता अपना अधिकार सुरक्षित रख सकें।
दिल्ली की यह पूरी प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची चुनाव व्यवस्था की बुनियाद है। चुनाव के समय मतदान केंद्र पर पहुंचने के बाद सबसे पहली जरूरत यही होती है कि मतदाता का नाम सही तरीके से सूची में मौजूद हो। अपात्र या गलत नामों की पहचान करना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी योग्य मतदाता का नाम केवल दस्तावेजी या तकनीकी समस्या के कारण बाहर न रह जाए। इसलिए अब इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन का तरीका सबसे महत्वपूर्ण होगा।
33.1 लाख नामों वाली यह सूची फिलहाल अंतिम फैसला नहीं, बल्कि सत्यापन की शुरुआत है। रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े नामों के इसमें शामिल होने से खबर जरूर बड़ी हो गई है, लेकिन असली कहानी उन लाखों आम मतदाताओं की है जिनके रिकॉर्ड की अब जांच होनी है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों की जांच, दावे और आपत्तियां और फिर अंतिम मतदाता सूची बताएगी कि इनमें से कितने नाम सामान्य प्रक्रिया के बाद बने रहते हैं और किन रिकॉर्ड में वास्तव में बदलाव की जरूरत पड़ती है।
दिल्ली की वोटर लिस्ट में आया यह 33.1 लाख का आंकड़ा इसलिए बड़ा है, क्योंकि इसके पीछे 33.1 लाख अलग-अलग मतदाता और उनके मतदान के अधिकार जुड़े हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सत्यापन के बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची की तस्वीर कैसी सामने आती है।



