अंतरराष्ट्रीय/ पश्चिम एशिया | ABC NATIONAL NEWS | दुबई | 26 सितंबर 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने का बड़ा प्रस्ताव रखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, अगर अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाता है, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देता है और ऐसा सीजफायर लागू होता है जिसमें लेबनान भी शामिल हो, तो ईरान 7 दिनों के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता फिर शुरू करने को तैयार है।
यह प्रस्ताव 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान एक निजी बैठक में रखा गया। बैठक में मौजूद एक व्यक्ति के अनुसार, अराघची ने इस प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी वहां मौजूद लोगों के सामने रखी। ईरान की ओर से सामने आया यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर तनाव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एशिया और यूरोप तक तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
ईरान ने अपने प्रस्ताव में सबसे पहले अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की शर्त रखी है। इसके साथ ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट और सीजफायर की मांग की गई है। खास बात यह है कि ईरान जिस सीजफायर की बात कर रहा है, उसमें लेबनान को भी शामिल करने की शर्त रखी गई है। यानी तेहरान की पेशकश केवल होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में व्यापक सैन्य तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।
ईरान के विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि अगर समझौता तेजी से होता है तो इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राजनीतिक फायदा मिल सकता है। यह टिप्पणी अराघची की ओर से रखे गए प्रस्ताव के राजनीतिक संदर्भ को भी सामने लाती है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से तत्काल कोई अंतिम सहमति सामने नहीं आई है।
ईरान की पेशकश ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव का केंद्र केवल परमाणु कार्यक्रम नहीं रहा। सैन्य कार्रवाई, तेल प्रतिबंध, समुद्री नाकाबंदी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति एक-दूसरे से जुड़ गए हैं। ऐसे में परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव केवल कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य तनाव को कम करने की संभावित कोशिश भी है।
होर्मुज़ को लेकर किसी समझौते का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते हैं। जलडमरूमध्य खुलने से समुद्री परिवहन में बनी अनिश्चितता कम हो सकती है, जबकि लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में तेल आपूर्ति और जहाजों की आवाजाही पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरान का प्रस्ताव अब अमेरिका के सामने एक सीधी शर्तों वाली पेशकश के रूप में है—नाकाबंदी हटे, तेल प्रतिबंधों में राहत मिले, व्यापक सीजफायर हो और उसके बाद 7 दिनों के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोला जाए तथा परमाणु बातचीत फिर शुरू हो। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वॉशिंगटन इस प्रस्ताव को किस रूप में देखता है और क्या दोनों देश इन शर्तों के आधार पर किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का भविष्य अब केवल ईरान और अमेरिका के बीच का मुद्दा नहीं है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। ईरान ने 7 दिनों की समयसीमा वाला प्रस्ताव सामने रख दिया है—अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह इस पेशकश पर बातचीत का रास्ता चुनता है या तनाव का सिलसिला आगे बढ़ता है।



