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यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का रोडमैप तैयार, पेरिस में जुटे 35 देशों के नेता

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 8 जनवरी 2026

यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर पश्चिमी देशों की रणनीति में एक बार फिर अहम हलचल देखने को मिली है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा है कि यूक्रेन के सहयोगी देशों के समूह—जिसे “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” कहा जा रहा है—ने यूक्रेन को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी देने के ढांचे पर ठोस और सकारात्मक प्रगति की है। मेलोनी के मुताबिक, यह पहल यूक्रेन को दीर्घकालिक सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नाटो सदस्यता के बिना नाटो जैसी सुरक्षा

मेलोनी ने बताया कि पेरिस बैठक में शामिल देशों ने युद्धविराम की संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बात पर गंभीर चर्चा की कि यूक्रेन को किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था दी जा सकती है। प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य यूक्रेन को सीधे नाटो की सदस्यता दिए बिना, वैसी ही सुरक्षा गारंटी देना है जैसी नाटो देशों को प्राप्त होती है। इससे यूक्रेन को रूस के संभावित सैन्य दबाव और भविष्य के हमलों के खिलाफ मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल सकेगा।

प्रस्तावित सुरक्षा ढांचे के प्रमुख बिंदु

सूत्रों के अनुसार, इस रोडमैप में यूक्रेन को निरंतर सैन्य सहायता, आधुनिक हथियारों की आपूर्ति, खुफिया जानकारी साझा करना, सैनिकों का प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा सहयोग और संकट की स्थिति में त्वरित अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच शांति बनाए रखने के लिए बहुराष्ट्रीय शांति सेना की संभावित तैनाती पर भी विचार किया गया है।

अस्थायी मदद से आगे, दीर्घकालिक रणनीति

यूक्रेन युद्ध के लंबे खिंचने और वैश्विक टकराव के खतरे के बीच पश्चिमी देश अब केवल अस्थायी सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहते। “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” की यह पहल इस बात का संकेत है कि यूक्रेन को लेकर पश्चिमी रणनीति अब दीर्घकालिक सुरक्षा ढांचे की ओर बढ़ रही है, जिससे यूरोप की सामूहिक सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

बैठक में कौन-कौन रहा शामिल

पेरिस में हुई इस अहम बैठक में 35 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष:
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्स, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टारमर, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी

विशेष अतिथि:
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो के महासचिव मार्क रुटे

अमेरिकी प्रतिनिधित्व:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरड कुश्नर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ

आगे की राह पर नजर

फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा गारंटी से जुड़ी “ऑपरेशनल डिटेल्स” पर सहमति बन चुकी है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन प्रतिबद्धताओं को लंबे समय तक प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। रूस इस बैठक का हिस्सा नहीं है, लेकिन अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच पर्दे के पीछे बातचीत जारी है। ऐसे में पेरिस बैठक को यूक्रेन युद्ध के भविष्य और यूरोप की सुरक्षा राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

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