कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में अमेरिका की “Abki Baar, Trump Sarkar” सरकार द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को भयानक बताया है। खड़गे ने कहा कि इस टैरिफ का पहला झटका ही लगभग ₹2.17 लाख करोड़ के नुकसान का संकेत देता है, और यह सिर्फ 10 प्रमुख क्षेत्रों तक सीमित है। उन्होंने चेताया कि यह कदम भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए गंभीर संकट लेकर आया है। खासकर कपास और कृषि आधारित उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जबकि प्रधानमंत्री पहले आश्वासन दे चुके थे कि वे किसानों के हित में “कोई भी व्यक्तिगत कीमत” चुकाने को तैयार हैं।
GDP पर बड़ा असर और चीन को मिलेगा लाभ
पत्र में मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेताया कि ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, इस टैरिफ से भारत की GDP का लगभग 1% प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा, जबकि चीन इस स्थिति से लाभ उठाएगा। खड़गे ने मोदी सरकार की सतही और दिखावटी विदेशी नीति—जिसमें मुस्कान, हग और सेल्फ़ी प्रमुख हैं—को आलोचना का विषय बनाया और कहा कि इस नीति की वजह से ट्रेड डील को सुरक्षित करने में विफलता स्पष्ट हो रही है।
टेक्सटाइल सेक्टर: 5 लाख रोजगार संकट में
खड़गे ने पत्र में भारतीय टेक्सटाइल और कपड़ा निर्यात उद्योग को इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित बताया। अनुमानित 5 लाख लोगों की नौकरी खतरे में हैं, जिसमें सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल हैं। उन्होंने चेताया कि निर्यात में गिरावट से न केवल उद्योग प्रभावित होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ेगा। लाखों श्रमिकों की आजीविका संकट में है और उनकी नौकरी की सुरक्षा खतरे में है।
जेम्स और ज्वैलरी उद्योग पर भारी दबाव
पत्र में उन्होंने जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर को भी टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित बताया। लगभग 1.5 से 2 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में हैं। विशेष रूप से सौराष्ट्र क्षेत्र में डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग में काम करने वाले लगभग 1 लाख श्रमिक अप्रैल से ही बेरोजगार हैं। खड़गे ने इसे भारत के निर्यात और रोजगार के महत्वपूर्ण स्तंभों पर हमला बताया।
श्रिम्प और मत्स्य उद्योग संकट में
कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा कि भारतीय श्रिम्प और मत्स्य उद्योग इस टैरिफ के चलते गहरे संकट में है। सीधे तौर पर 5 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 25 लाख लोगों का जीवन संकट में है। इस संकट का प्रभाव न केवल उद्योग बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई देगा।
मोदी सरकार की विदेशी नीति पर गंभीर सवाल
पत्र में खड़गे ने मोदी सरकार की विदेशी नीति की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होने चाहिए। लेकिन मुस्कान, हग और सेल्फ़ी जैसी सतही गतिविधियों के कारण देश के हितों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नीति की असफलता का सबसे स्पष्ट प्रमाण अमेरिकी टैरिफ है और सरकार विदेशी बाजारों में भारत की मजबूती बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है।
देश की सुरक्षा और रोजगार खतरे में
खड़गे ने पत्र में चेताया कि मोदी सरकार ने किसानों, उद्योग और रोजगार की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस टैरिफ के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है और करोड़ों भारतीय परिवारों की रोज़मर्रा की जिंदगी संकट में है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत कमजोर पड़ रहा है और इसके विपरीत चीन को लाभ हो रहा है। खड़गे ने कहा कि अब समय है कि सरकार सतर्क हो, वास्तविक कदम उठाए और देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरे।
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