शिक्षा/राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 18 अगस्त 2026
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को Jharkhand Staff Selection Commission-Combined Graduate Level यानी JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया। यह फैसला उस समय आया है जब JPSC-JSSC अभ्यर्थी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार के इस निर्णय के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच राहत की भावना जरूर दिखाई दी, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक करीब चार घंटे चली। बैठक में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया गया। सरकार के इस कदम को छात्रों की लगातार बढ़ती नाराजगी के बीच महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। छात्रों का आरोप रहा है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के सवाल उठे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
हालांकि परीक्षा रद्द होने के बावजूद छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग CBI जांच की है और अभी तक यह मांग पूरी नहीं हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि JSSC-CGL परीक्षा रद्द किया जाना उनके लिए खुशी की बात है, लेकिन केवल परीक्षा रद्द करने से पूरा विवाद समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक कथित अनियमितताओं की CBI जांच शुरू नहीं होती, तब तक उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की मांग का केंद्र अब परीक्षा रद्द किए जाने से आगे बढ़कर पूरे मामले की जांच पर है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह सामने आना चाहिए कि आखिर भर्ती प्रक्रिया में क्या हुआ। अभ्यर्थी चाहते हैं कि जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए जिस पर उन्हें भरोसा हो और जांच के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसी वजह से सरकार के फैसले के बाद भी आंदोलनकारियों ने अपना धरना और भूख हड़ताल समाप्त नहीं की है।
JSSC-CGL परीक्षा झारखंड के युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों में नियुक्ति की उम्मीद के साथ इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के बाद अब अभ्यर्थियों के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग है, तो दूसरी तरफ दोबारा परीक्षा आयोजित होने की प्रक्रिया और उसकी समयसीमा को लेकर भी सवाल खड़े होंगे। छात्रों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नई परीक्षा कब होगी और सरकार भर्ती प्रक्रिया को किस तरह पारदर्शी बनाएगी।
सरकार की ओर से TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला भी इस मामले को व्यापक बनाता है। इसका मतलब है कि विवाद केवल JSSC-CGL तक सीमित नहीं रहा, बल्कि TDPL के जरिए आयोजित अन्य परीक्षाएं भी सरकार के फैसले के दायरे में आ गई हैं। अब इन परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के सामने भी आगे की प्रक्रिया और नई परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होंगे। सरकार को आने वाले समय में इन परीक्षाओं की नई तारीखों, प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के हितों को लेकर स्पष्ट रोडमैप देना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार बड़ा मुद्दा बनता जा रहा था। ऐसे समय में सरकार द्वारा JSSC-CGL रद्द करने का फैसला आंदोलन को शांत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। लेकिन छात्रों द्वारा CBI जांच की मांग पर आंदोलन जारी रखने के ऐलान से साफ है कि सरकार के सामने अभी चुनौती खत्म नहीं हुई है। अब सरकार को यह तय करना होगा कि छात्रों की जांच संबंधी मांग पर उसका अगला कदम क्या होगा।
इससे पहले भी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र आंदोलन देखने को मिले हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के लिए परीक्षा की निष्पक्षता केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके करियर और भविष्य से जुड़ा सवाल होती है। यही वजह है कि जब किसी भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो छात्रों की नाराजगी तेजी से व्यापक आंदोलन में बदल सकती है। झारखंड का मौजूदा विवाद भी इसी व्यापक चिंता को सामने लाता है।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा रद्द करने की नहीं, बल्कि अगली भर्ती प्रक्रिया पर छात्रों का भरोसा बहाल करने की है। इसके लिए परीक्षा की नई व्यवस्था, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, एजेंसियों की जवाबदेही और परिणाम प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर स्पष्ट कदम उठाने होंगे। वहीं छात्रों की CBI जांच की मांग पर सरकार का रुख भी आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा।
फिलहाल झारखंड सरकार ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला ले लिया है, लेकिन छात्रों का आंदोलन जारी है। अभ्यर्थियों का संदेश साफ है कि परीक्षा रद्द होना मंजूर है, लेकिन CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार छात्रों की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या जांच को लेकर कोई औपचारिक कदम उठाया जाता है। यही फैसला झारखंड में चल रहे इस छात्र आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा।




