Home » International » होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान लगाएगा टोल? दुनिया की तेल सप्लाई और भारत पर क्या होगा असर

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान लगाएगा टोल? दुनिया की तेल सप्लाई और भारत पर क्या होगा असर

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 11 मई 2026

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से “टोल” या विशेष शुल्क वसूलने की तैयारी में है। साथ ही कुछ देशों और जहाजों को प्राथमिकता देने की भी बात कही जा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान “Persian Gulf Strait Authority” नाम की नई व्यवस्था के जरिए जहाजों की आवाजाही और टोल वसूली को औपचारिक रूप देने पर काम कर रहा है। ईरान का तर्क है कि वह इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा, निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है, इसलिए शुल्क लेना उसका अधिकार है।

बताया जा रहा है कि ईरान उन जहाजों को प्राथमिकता देगा जो उसकी नई शर्तों और शुल्क व्यवस्था को स्वीकार करेंगे। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन और ईरान से जुड़े जहाजों को अपेक्षाकृत आसान आवाजाही मिल सकती है, जबकि अमेरिका समर्थक देशों या बिना अनुमति वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकती है।

हालांकि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने ईरान की इस कोशिश का विरोध किया है। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और यहां “शांतिपूर्ण नौवहन की स्वतंत्रता” लागू होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वॉशिंगटन किसी भी तरह के “अनधिकृत टोल” को स्वीकार नहीं करेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण हाल के महीनों में होर्मुज क्षेत्र में कई बार जहाजों पर हमले, ड्रोन गतिविधियां और समुद्री आवाजाही बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रूट को “हाई रिस्क जोन” घोषित किया है, जिससे बीमा लागत और समुद्री परिवहन खर्च तेजी से बढ़ गए हैं।

भारत के लिए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि होर्मुज में टोल, प्रतिबंध या सैन्य तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल, गैस और परिवहन लागत पर पड़ सकता है।

भारतीय अधिकारियों ने अब तक किसी भी “ईरानी टोल भुगतान” की पुष्टि नहीं की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत फिलहाल अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और वैकल्पिक सप्लाई मार्गों पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह रणनीति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भी है। होर्मुज पर नियंत्रण की बहस के जरिए ईरान अमेरिका और पश्चिमी देशों पर दबाव बढ़ाना चाहता है, ताकि प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति मजबूत कर सके।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होगा या यह वैश्विक ऊर्जा संकट का अगला बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments