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ईरान संकट की मार: Bisleri – Kinley समेत बोतलबंद पानी महंगा होने के आसार, प्लास्टिक की लागत बढ़ी

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 मार्च 2026

मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष का असर अब भारत के रोजमर्रा के बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और प्लास्टिक कच्चे माल की महंगाई के कारण देश में बोतलबंद पानी की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे Bisleri, Kinley, Aquafina जैसे ब्रांडों की पानी की बोतलें आने वाले दिनों में महंगी हो सकती हैं।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पानी की बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाला PET प्लास्टिक और अन्य पॉलिमर सीधे तौर पर पेट्रोलियम उत्पादों से तैयार होते हैं। जैसे-जैसे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, वैसे-वैसे प्लास्टिक की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर पैकेजिंग उद्योग पर पड़ता है।

प्लास्टिक और पैकेजिंग महंगी

रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद प्लास्टिक रेज़िन और पॉलिमर की कीमतों में तेज उछाल आया है। कई जगहों पर प्लास्टिक बोतल बनाने की लागत 40–50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके कारण बोतलों के ढक्कन, लेबल और पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है।

छोटे निर्माताओं ने बढ़ाए दाम

देश के कई छोटे और मझोले पैकेज्ड-वॉटर निर्माता पहले ही वितरकों को बोतलों के दाम बढ़ाकर दे रहे हैं। कुछ कंपनियों ने प्रति बोतल करीब एक रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है, जबकि आने वाले समय में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

गर्मियों से पहले बढ़ी चिंता

भारत का पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बाजार करीब 40 हजार करोड़ रुपये का माना जाता है और गर्मियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे समय में कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। यदि हालात ऐसे ही रहे तो गर्मी के मौसम में उपभोक्ताओं को बोतलबंद पानी के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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वैश्विक संघर्ष का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान-इजरायल युद्ध ने तेल और पेट्रोकेमिकल आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाले रसायन और प्लास्टिक कच्चे माल की आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ने से दुनिया भर में पैकेजिंग उद्योग की लागत बढ़ रही है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, अगर पश्चिम एशिया का तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले हफ्तों में पानी की बोतल, प्लास्टिक पैकेजिंग और कई दैनिक उपभोक्ता उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं।

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