अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | न्यूयॉर्क/नई दिल्ली | 24 जून 2026
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक अनौपचारिक मंच पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की पाकिस्तान की कोशिश को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इस पर किसी भी प्रकार की बाहरी टिप्पणी या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथनेनी हरीश ने चीन और पाकिस्तान द्वारा आयोजित “अरिया-फॉर्मूला” बैठक में पाकिस्तान की टिप्पणियों को “अनुचित और अनावश्यक” करार देते हुए कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इससे जुड़े सभी मुद्दे पूरी तरह भारत के संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर आते हैं।
भारत ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने रिकॉर्ड पर नजर डालनी चाहिए, जिसने दशकों तक सीमा पार आतंकवाद को संरक्षण दिया है और क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुंचाया है। भारतीय प्रतिनिधि ने संकेत दिया कि आतंकवाद को नीति का हिस्सा बनाने वाले देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और सुरक्षा की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
यह विवाद उस समय सामने आया जब पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की। हालांकि भारत ने तुरंत जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया कि संयुक्त राष्ट्र के ऐसे मंचों का इस्तेमाल द्विपक्षीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय रंग देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लगातार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाकर वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। पिछले कुछ वर्षों में अधिकांश देशों ने यह स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दे द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से ही सुलझाए जाने चाहिए।
दिलचस्प बात यह भी है कि यह बैठक ऐसे समय हुई जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी कूटनीतिक स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। जी-20 की सफल मेजबानी, वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने का प्रयास और विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भूमिका ने भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया है।
भारत ने एक बार फिर दोहराया कि जम्मू-कश्मीर में विकास, लोकतंत्र और सुशासन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और वहां के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। भारत का स्पष्ट संदेश था कि कश्मीर पर किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न तो स्वीकार्य है और न ही प्रासंगिक।
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत की यह सख्त प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तान को जवाब नहीं थी, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी थी कि नई दिल्ली अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती।




