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अलविदा आइची-नागोया, अब दोहा में मिलेंगे; एशियन गेम्स में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

स्पोर्ट्स | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 अक्टूबर 2026

आइची-नागोया में तिरंगा शान से लहराकर भारत ने एशियन गेम्स 2026 को विदाई दे दी है। 20वें एशियाई खेलों का रविवार को जापान में शानदार समापन हुआ और इसके साथ ही अब अगली मुलाकात 2030 में दोहा में होगी। समापन समारोह के दौरान एशियन ओलंपिक काउंसिल का झंडा कतर को सौंपा गया। भारत के लिए ये खेल कई यादगार उपलब्धियां लेकर आए। भारतीय दल ने कुल 85 पदक—21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य अपने नाम किए और पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। कुल पदकों के लिहाज से यह भारत का एशियाई खेलों के इतिहास में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत का इससे बेहतर प्रदर्शन 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में रहा था, जब भारतीय खिलाड़ियों ने 106 पदक जीते थे।

भारत के 85 पदकों की कहानी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि अलग-अलग खेलों में उभरती भारतीय ताकत की तस्वीर भी है। एथलेटिक्स भारत के लिए सबसे सफल खेल रहा, जहां खिलाड़ियों ने कुल 24 पदक जीते। शूटिंग में 15, तीरंदाजी में 9, जबकि बॉक्सिंग और कुश्ती में 6-6 पदक भारत की झोली में आए। कई खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से नए रिकॉर्ड बनाए और कुछ ने ऐसे मुकाबलों में पदक जीते जहां भारत पहले कभी उस स्तर पर नहीं पहुंच पाया था। शूटिंग में नीरू ढांडा का प्रदर्शन खास तौर पर शानदार रहा। उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता और समापन समारोह में भारतीय दल की ध्वजवाहक भी बनीं।

हालांकि भारत का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन इस बार पदकों की संख्या हांगझोउ के रिकॉर्ड से नीचे रही। 2023 में भारत ने 106 पदक जीते थे, जबकि आइची-नागोया में यह संख्या 85 रही। यानी कुल पदकों में कमी आई और स्वर्ण पदक भी 28 से घटकर 21 रह गए। इसके बावजूद चौथे स्थान पर भारत की मौजूदगी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एशिया के खेल मानचित्र पर चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत खेल शक्तियों के बीच भारत लगातार शीर्ष पांच में अपनी जगह बनाए हुए है। भारत ने 2023 में भी चौथा स्थान हासिल किया था और 2026 में भी उसी स्थान को बरकरार रखा। यह निरंतरता बताती है कि भारतीय खेल अब किसी एक-दो खेल पर निर्भर नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ रही है।

इन खेलों में भारतीय हॉकी की वापसी भी खास रही। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत की हॉकी ताकत को फिर से सामने रखा। एथलेटिक्स में भी कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और शूटिंग, कबड्डी, तीरंदाजी तथा अन्य खेलों में भारत ने मजबूत चुनौती पेश की। यह प्रदर्शन उस बदलाव की ओर इशारा करता है जिसमें भारत पारंपरिक खेलों के साथ-साथ अलग-अलग ओलंपिक और एशियाई खेलों में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। हालांकि कुछ खेलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला और कुछ बड़े दावेदार पदक से चूक गए, लेकिन पूरे अभियान को देखें तो 85 पदकों का आंकड़ा भारतीय खेलों के लिए मजबूत उपलब्धि माना जाएगा।

दूसरी ओर, पदक तालिका में चीन एक बार फिर सबसे आगे रहा। चीन ने कुल 341 पदक, जिनमें 169 स्वर्ण शामिल हैं, जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। जापान 269 पदकों के साथ दूसरे और दक्षिण कोरिया 150 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। यह अंतर यह भी बताता है कि भारत ने भले ही अपनी स्थिति मजबूत की हो, लेकिन एशिया की शीर्ष खेल शक्तियों से मुकाबला करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। खासकर स्वर्ण पदकों की संख्या और अलग-अलग खेलों में गहराई बढ़ाना आने वाले वर्षों की बड़ी चुनौती होगी।

आइची-नागोया के इन खेलों का समापन सिर्फ एक आयोजन का अंत नहीं है। अब नजरें दोहा 2030 पर टिक गई हैं। कतर अगली बार एशिया के सबसे बड़े बहु-खेल आयोजन की मेजबानी करेगा। कतर ने पहले भी 2006 में एशियन गेम्स की मेजबानी की थी और अब 2030 में एक बार फिर दुनिया का ध्यान दोहा पर होगा। आयोजन समिति के मुताबिक कतर के पास पहले से मौजूद कई बड़े खेल परिसर और बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जाएगा तथा जरूरत के मुताबिक उन्हें उन्नत किया जाएगा।

आइची-नागोया से भारत 85 पदकों की उपलब्धि, 21 स्वर्ण की चमक और कई नई उम्मीदों के साथ लौट रहा है। हांगझोउ का रिकॉर्ड भले नहीं टूटा, लेकिन दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन यह बताता है कि भारतीय खेलों ने अपनी जगह मजबूत की है। अब चुनौती साफ है—दोहा में सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ानी नहीं, बल्कि स्वर्ण का आंकड़ा ऊपर ले जाना है और एशिया की शीर्ष खेल शक्तियों से दूरी कम करनी है। आइची-नागोया को अलविदा, अब अगला पड़ाव दोहा 2030।

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