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जर्मनी के रक्षा उद्योग में संकट: रेयर अर्थ की कमी ने सुरक्षा आपूर्ति को बना दिया मुश्किल

बर्लिन, 2 नवंबर 2025 — जर्मनी का रक्षा उद्योग इस समय गंभीर आपूर्ति संकट का सामना कर रहा है। देश की रक्षा प्रणालियों, मिसाइल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रडार सिस्टम के लिए आवश्यक “रेयर अर्थ एलिमेंट्स” (Rare Earth Elements) की भारी कमी ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। इन दुर्लभ धातुओं पर जर्मनी की लगभग पूरी निर्भरता चीन पर है, और अब यह निर्भरता एक रणनीतिक जाल बन चुकी है।

ये रेयर अर्थ तत्व — जैसे नियोडिमियम, टर्बियम, और डिस्प्रोसियम — आधुनिक सैन्य उपकरणों की आत्मा माने जाते हैं। टैंकों से लेकर ड्रोन और जेट रडार सिस्टम तक, हर उन्नत तकनीकी हथियार इनके बिना अधूरा है। लेकिन चीन द्वारा हाल के महीनों में अपने निर्यात नियंत्रण सख्त करने और आपूर्ति श्रृंखला में सीमाएं लगाने के बाद जर्मनी की रक्षा उत्पादन योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

जर्मन इंडस्ट्री फेडरेशन (BDI) ने चेताया है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो “जर्मनी की रक्षा क्षमता और तकनीकी विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि पिछले दशक में यूरोपीय देशों ने ऊर्जा के क्षेत्र में जिस तरह रूस पर निर्भरता का खामियाजा भुगता, वैसा ही अब जर्मनी को रक्षा कच्चे माल में चीन पर निर्भर रहने से झेलना पड़ सकता है।

वर्तमान में जर्मनी की सरकार और उद्योग जगत दोनों वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुटे हैं। देश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अफ्रीकी देशों से आपूर्ति समझौते कर रहा है, साथ ही घरेलू खनन और पुनर्चक्रण परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन देने पर विचार हो रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं को फलीभूत होने में कम से कम 3 से 5 वर्ष लग सकते हैं, और तब तक रक्षा उत्पादन की रफ्तार पर दबाव बना रहेगा।

एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक के अनुसार, “जर्मनी को अब सिर्फ तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। अन्यथा उसकी रक्षा क्षमताएं अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संकटों की बंधक बन जाएंगी।” रेयर अर्थ की यह समस्या जर्मनी के लिए केवल एक औद्योगिक चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक स्वायत्तता की कसौटी बन गई है।

 

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