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ईंधन संकट की आहट! एयरलाइन इंडस्ट्री पर मंडराया बड़ा खतरा

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बिजनेस | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अप्रैल 2026

देश की एविएशन इंडस्ट्री इस समय एक बड़े दबाव से गुजर रही है और इसकी वजह है जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लगातार बढ़ती और अनिश्चित कीमतें। एयरलाइन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है और साफ कहा है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो देश में फ्लाइट सेवाओं पर असर पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन लागत में तेजी से हो रही वृद्धि कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। FIA, जो Air India, IndiGo और SpiceJet जैसी प्रमुख एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करता है, ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि मौजूदा ईंधन कीमतों का ढांचा एयरलाइन संचालन को अस्थिर बना रहा है। संगठन के मुताबिक, ATF की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और एड-हॉक प्राइसिंग सिस्टम के कारण एयरलाइंस को अपने नेटवर्क और रूट की व्यवहार्यता पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है, जिससे पूरे सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ATF की कीमतों में प्रति लीटर ₹73 से ₹75 तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर उन रूट्स पर पड़ा है, जो पहले से ही कम मार्जिन पर चल रहे थे। कई रूट अब आर्थिक रूप से गैर-व्यवहारिक होते जा रहे हैं, जिससे एयरलाइंस को नुकसान उठाना पड़ रहा है। खासकर कम लागत वाले विदेशी एयरलाइंस के साथ प्रतिस्पर्धा में भारतीय कंपनियों की स्थिति और कठिन हो गई है।

FIA ने सरकार से इस संकट से निपटने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF पर लगने वाले 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को अस्थायी रूप से हटाने, वैट में कमी लाने और एक स्थिर मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा टैक्स ढांचा लागत के बोझ को और बढ़ा रहा है, जिससे कंपनियों के लिए संचालन जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतों में इसी तरह अस्थिरता बनी रही तो इसका सीधा असर यात्रियों पर भी पड़ेगा। हवाई किराए में बढ़ोतरी, उड़ानों की संख्या में कमी और समय-सारणी में बदलाव जैसे असर देखने को मिल सकते हैं। इससे देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

एविएशन सेक्टर एक नाजुक दौर से गुजर रहा है, जहां बढ़ती मांग और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बन गया है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और क्या एयरलाइन इंडस्ट्री को इस दबाव से राहत मिल पाती है या नहीं।

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