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गाजियाबाद की हाईराइज में आग का तांडव: कई फ्लैट खाक… करोड़ों की संपत्ति राख, 450 लोग समय रहते बचाए गए

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राष्ट्रीय / उत्तर प्रदेश | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | गाजियाबाद (इंदिरापुरम) | 29 अप्रैल 2026

एक ही झटके में उजड़े घर, लेकिन बच गई सैकड़ों जानें

गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में कई फ्लैटों को खाक कर दिया और करोड़ों रुपये की संपत्ति को राख में बदल दिया, लेकिन समय रहते करीब 450 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। 9वीं मंजिल के एक फ्लैट से शुरू हुई यह आग तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैलती चली गई और पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। लोग अपने घरों से भागते नजर आए, किसी को अपने सामान की चिंता नहीं थी—हर किसी के लिए उस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता सिर्फ अपनी और अपने परिवार की जान बचाना थी। इस घटना ने जहां एक तरफ भारी नुकसान छोड़ा, वहीं दूसरी तरफ यह भी दिखा दिया कि समय पर सतर्कता और बचाव से बड़ी से बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता है।

सुबह की शांति टूटी, मिनटों में दहशत में बदला माहौल

बुधवार की सुबह सामान्य थी, लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया। सोसाइटी में रहने वाले लोग अपने-अपने कामों में लगे हुए थे, तभी अचानक आग की लपटें दिखने लगीं। पहले तो लोगों को लगा कि शायद मामूली आग है, लेकिन देखते ही देखते वह तेजी से फैलने लगी और पूरा टावर उसकी चपेट में आने लगा। हर तरफ से चीख-पुकार की आवाजें आने लगीं और लोग अपने फ्लैट छोड़कर बाहर निकलने लगे। यह मंजर इतना भयावह था कि कई लोग समझ ही नहीं पाए कि क्या करें—बस किसी तरह सीढ़ियों से नीचे उतरते गए और सुरक्षित जगह तक पहुंचने की कोशिश करते रहे।

9वीं मंजिल से 13वीं तक पहुंची आग, कई फ्लैट राख

आग की शुरुआत 9वीं मंजिल से हुई और कुछ ही मिनटों में यह ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। तेज हवा और बिल्डिंग की ऊंचाई के कारण आग को फैलने में ज्यादा समय नहीं लगा। देखते ही देखते 10वीं, 11वीं और कई रिपोर्ट्स के अनुसार 12वीं और 13वीं मंजिल तक लपटें पहुंच गईं। कई फ्लैट इसकी चपेट में आ गए और उनमें रखा हर सामान जलकर राख हो गया। जिन घरों में कुछ देर पहले तक जिंदगी सामान्य चल रही थी, वे अचानक खामोश और वीरान हो गए। दीवारों पर कालिख, टूटे हुए शीशे और जले हुए सामान इस बात की गवाही दे रहे थे कि आग कितनी भयानक थी। नुकसान इतना ज्यादा था कि उसे करोड़ों रुपये में आंका जा रहा है।

धुएं का गुबार, आसमान काला… दूर तक दिखा भयावह मंजर

आग से उठने वाला धुआं इतना घना था कि वह कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले लोगों ने भी आसमान में काले धुएं का गुबार देखा। लपटें इतनी ऊंची थीं कि आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग भी डर गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ देर के लिए पूरा इलाका जैसे थम गया था और हर किसी की नजर उसी जलती हुई इमारत पर टिकी थी।

अफरातफरी का मंजर: जान बचाने के लिए भागते लोग

जैसे ही आग फैली, सोसाइटी में अफरातफरी मच गई। लोग अपने फ्लैट छोड़कर सीढ़ियों की तरफ भागने लगे। कई लोग घबराहट में गिरते-पड़ते नीचे पहुंचे। बच्चों को गोद में उठाकर और बुजुर्गों को सहारा देकर लोग बाहर निकले। किसी को अपने कीमती सामान या घर की चिंता नहीं थी—हर कोई सिर्फ अपनी जान बचाने में लगा था। कई लोग नीचे खड़े होकर अपने घरों को जलते हुए देखते रहे और उनकी आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।

450 लोगों की सुरक्षित निकासी, टली बड़ी त्रासदी

इस हादसे में सबसे बड़ी राहत यह रही कि करीब 450 लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अगर थोड़ी भी देर हो जाती, तो यह घटना बेहद गंभीर हो सकती थी। दमकलकर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से सभी को बाहर निकाला गया और किसी की जान नहीं गई। हालांकि कई परिवारों का सब कुछ जलकर खत्म हो गया, लेकिन जान बच जाने की राहत उनके लिए सबसे बड़ी बात थी।

दमकल की जंग: संकरा रास्ता बना बड़ी बाधा

आग बुझाने के लिए दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन राहत कार्य में काफी दिक्कतें आईं। सोसाइटी के अंदर टावर तक पहुंचने का रास्ता संकरा था, जिससे फायर टेंडर सीधे बिल्डिंग के पास नहीं पहुंच सके। इसी वजह से आग पर काबू पाने में समय लगा। दमकलकर्मियों को काफी मेहनत करनी पड़ी और करीब दो घंटे बाद आग को नियंत्रित किया जा सका। इसके बाद भी लंबे समय तक कूलिंग का काम चलता रहा।

आग की वजह: शॉर्ट सर्किट या लापरवाही?

आग लगने की असली वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार एसी में शॉर्ट सर्किट या रेनोवेशन के दौरान लापरवाही इसकी वजह हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईराइज इमारतों में आग बहुत तेजी से फैलती है, इसलिए छोटी सी चिंगारी भी बड़ा हादसा बन सकती है।

‘हीरो’ अजय शर्मा: खून बहता रहा, लेकिन बचाई 25 से अधिक जान

इस हादसे में अजय शर्मा ने बहादुरी की मिसाल पेश की। जब लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे, तब वह दूसरों की मदद करने के लिए आगे आए। उन्होंने बिना समय गंवाए फायर सिस्टम चालू किया और कई लोगों को बाहर निकाला। इस दौरान उनके हाथ में चोट लग गई और खून बहने लगा, लेकिन उन्होंने रुकना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने करीब 25 लोगों की जान बचाई और आज लोग उन्हें इस घटना का हीरो मान रहे हैं।

सरकार अलर्ट, सीएम योगी का सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।

बड़े सवाल: क्या हाईराइज सोसाइटी सच में सुरक्षित हैं?

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हाईराइज सोसाइटी में रहने वाले लोग वास्तव में सुरक्षित हैं। क्या फायर सेफ्टी सिस्टम सही तरीके से काम कर रहे हैं? क्या इमरजेंसी की तैयारी पूरी है? लोगों का कहना है कि अगर बेहतर व्यवस्था होती, तो नुकसान कम हो सकता था।

बच गई जानें, लेकिन छोड़ गया बड़ा सबक

इस हादसे में जानें तो बच गईं, लेकिन कई परिवारों का सब कुछ खत्म हो गया। यह घटना एक बड़ा सबक है कि सुरक्षा के बिना आधुनिक जीवन भी खतरे से भरा हो सकता है। अब जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं से सीख लेकर बेहतर इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

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