राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 29 अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट देश की राजनीति का केंद्र बन गई है। यहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान और IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के बीच टकराव अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गंभीर आपराधिक आरोपों और FIR तक पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी निष्पक्षता, प्रशासनिक भूमिका और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
महिला की शिकायत से मचा सियासी भूचाल
फाल्टा थाने में दर्ज एक शिकायत के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 की देर रात एक महिला ने आरोप लगाया कि IPS अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बल (CRPF) के जवान जबरन उसके घर में घुस आए। शिकायत में कहा गया है कि न तो उनके पास कोई सर्च वारंट था और न ही कोई वैध दस्तावेज। महिला का आरोप है कि तलाशी के नाम पर घर में मौजूद महिलाओं के साथ मारपीट की गई, धक्का-मुक्की हुई और छेड़छाड़ जैसी गंभीर घटनाएं सामने आईं।
पीड़िता ने यह भी दावा किया कि सुरक्षा बलों ने उन्हें एक विशेष राजनीतिक दल—जिसे लेकर उन्होंने इशारों में Bharatiya Janata Party की ओर संकेत किया—के पक्ष में मतदान करने के लिए दबाव बनाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने निर्देश नहीं माने तो 4 मई के बाद गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। महिला ने निष्पक्ष जांच, FIR दर्ज करने और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
FIR दर्ज, कानूनी मोड़ पर पहुंचा मामला
इस शिकायत के आधार पर अजय पाल शर्मा और कुछ अज्ञात CRPF जवानों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं हो सकी है, लेकिन मामला दर्ज होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब चुनावी प्रक्रिया अपने निर्णायक चरण में है, और हर घटना का सीधा असर मतदाताओं के मनोविज्ञान पर पड़ सकता है।
‘वो सिंघम तो मैं पुष्पा’—बयानबाज़ी से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में पहले से ही तीखी बयानबाज़ी चल रही थी। TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने IPS अजय पाल शर्मा को निशाने पर लेते हुए फिल्मी अंदाज़ में कहा था, “वो सिंघम होंगे, लेकिन मैं पुष्पा हूं”। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया था।
जहांगीर ने आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल विपक्षी दलों के खिलाफ किया जा रहा है और निष्पक्षता खतरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अधिकारी एक पक्ष विशेष को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
वायरल वीडियो और नए विवाद
मामले को और जटिल तब बना दिया जब अजय पाल शर्मा से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। एक वीडियो में उन्हें TMC उम्मीदवार के घर जाकर सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए देखा गया। वीडियो में कथित तौर पर वे यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर “बदमाशी” की खबर मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, एक अन्य वीडियो को लेकर भी विवाद हुआ, जिसमें दावा किया गया कि वह एक निजी कार्यक्रम में डांस करते नजर आ रहे हैं। इस पर TMC नेताओं, खासकर महुआ मोइत्रा ने तीखा हमला बोला और सोशल मीडिया पर कई टिप्पणियां कीं। हालांकि इन वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।
विपक्ष का हमला, BJP का पलटवार
TMC ने इस पूरे मामले को महिला सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया है। पार्टी का कहना है कि अगर चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों पर इस तरह के आरोप लगते हैं, तो यह बेहद गंभीर संकेत है।
वहीं, Bharatiya Janata Party ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। BJP नेताओं का कहना है कि चुनाव के समय इस तरह के आरोप लगाकर माहौल को प्रभावित करने और सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस तरह की घटनाएं महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़ा करती हैं। उन्होंने मांग की कि मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
चुनाव आयोग पर भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Election Commission of India की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। विपक्षी दल पहले से ही आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं, और अब इस घटना के बाद उन आरोपों को और बल मिला है।
TMC ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। हालांकि, आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मामले की रिपोर्ट तलब की जा सकती है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और जांच की दिशा
शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर अजय पाल शर्मा की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि चूंकि वह चुनाव आयोग के पुलिस ऑब्जर्वर हैं, इसलिए क्षेत्र में होने वाली हर कार्रवाई की जवाबदेही उनसे जुड़ी है।
अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले को किस दिशा में ले जाती हैं और क्या आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।
चुनावी असर और आगे की राह
बंगाल चुनाव पहले से ही बेहद संवेदनशील और प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। ऐसे में इस तरह के आरोप न केवल राजनीतिक माहौल को गर्म करते हैं, बल्कि मतदाताओं के बीच भी असमंजस पैदा करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला चुनावी नैरेटिव को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब इसमें महिला सुरक्षा, प्रशासनिक निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे संवेदनशील मुद्दे जुड़े हों।
यह विवाद बंगाल चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खियों में शामिल हो चुका है। अब सबकी नजर जांच की पारदर्शिता, चुनाव आयोग की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।




