एजुकेशन / जॉब | मालविका | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अप्रैल 2026
अगर आपने भारत में BSc नर्सिंग की पढ़ाई की है और अब अमेरिका जाकर नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, तो यह सपना पूरी तरह संभव है—लेकिन इसके लिए सही जानकारी और सही प्रक्रिया समझना बेहद जरूरी है। अच्छी बात यह है कि भारतीय नर्सों की अमेरिका में काफी मांग है, क्योंकि वहां हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और स्टाफ की कमी लगातार बनी हुई है। यही वजह है कि भारत में पढ़ाई करने के बाद हजारों नर्सें हर साल अमेरिका में अपना करियर बनाने की कोशिश करती हैं। सबसे पहले यह समझ लीजिए कि सिर्फ BSc नर्सिंग की डिग्री होने से सीधे अमेरिका में नौकरी नहीं मिलती, लेकिन यह आपके लिए दरवाजा जरूर खोल देती है। असली प्रक्रिया डिग्री के बाद शुरू होती है, जिसमें कुछ जरूरी टेस्ट, लाइसेंस और वीजा शामिल होते हैं।
इस पूरे प्रोसेस का पहला कदम है आपकी डिग्री का वेरिफिकेशन। इसके लिए CGFNS यानी “कमीशन ऑन ग्रेजुएट्स ऑफ फॉरेन नर्सिंग स्कूल्स” की मदद ली जाती है। यह संस्था यह जांचती है कि आपकी पढ़ाई अमेरिकी मानकों के अनुसार है या नहीं। इसमें यह देखा जाता है कि आपने मेडिकल, सर्जिकल, पीडियाट्रिक, ऑब्स्टेट्रिक और साइकेट्रिक नर्सिंग जैसे विषय पढ़े हैं या नहीं, और क्या आप अपने राज्य के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड हैं। अगर आपकी डिग्री सही पाई जाती है, तो आगे का रास्ता खुल जाता है।
दूसरा अहम कदम है अंग्रेजी भाषा का प्रमाण देना। अमेरिका में मरीजों और डॉक्टरों से संवाद अंग्रेजी में होता है, इसलिए यह जरूरी है कि आप भाषा में सहज हों। इसके लिए आपको IELTS या TOEFL जैसे टेस्ट देने होते हैं। आमतौर पर IELTS में 7 या उससे ज्यादा स्कोर और TOEFL iBT में 83 या उससे ऊपर स्कोर को अच्छा माना जाता है। हालांकि कुछ मामलों में अगर आपकी पढ़ाई पूरी तरह अंग्रेजी में हुई है, तो यह शर्त थोड़ी आसान भी हो सकती है, लेकिन बेहतर यही है कि आपके पास स्कोर मौजूद हो।
अब आता है सबसे महत्वपूर्ण और थोड़ा कठिन चरण—NCLEX-RN एग्जाम। यह अमेरिका में नर्स बनने के लिए जरूरी लाइसेंसिंग परीक्षा है। बिना इस एग्जाम को पास किए आप वहां नर्स के तौर पर काम नहीं कर सकते। इस परीक्षा के लिए आपको पहले उस राज्य के नर्सिंग बोर्ड में आवेदन करना होगा, जहां आप काम करना चाहते हैं। वहां से आपको “Authorization to Test” यानी ATT मिलेगा, जिसके बाद आप परीक्षा की तारीख चुन सकते हैं। यह एग्जाम भारत में भी कुछ निर्धारित सेंटरों पर दिया जा सकता है।
जब आप NCLEX-RN पास कर लेते हैं और अंग्रेजी की शर्त भी पूरी कर लेते हैं, तो अगला कदम होता है VisaScreen® सर्टिफिकेट लेना। यह भी CGFNS द्वारा जारी किया जाता है और यह साबित करता है कि आप अमेरिका में काम करने के लिए पूरी तरह योग्य हैं—यानी आपकी डिग्री, भाषा और लाइसेंस सभी सही हैं।
इसके बाद सबसे जरूरी होता है नौकरी और वीजा। अमेरिका में काम करने के लिए आपको किसी अस्पताल या हेल्थकेयर संस्था से जॉब ऑफर चाहिए, जो आपका वीजा स्पॉन्सर करे। आमतौर पर H-1B visa के जरिए नर्सों को काम करने का मौका मिलता है, लेकिन इसमें लॉटरी सिस्टम होता है, इसलिए थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है। इसके अलावा एक और अच्छा विकल्प है EB-3 visa, जिसके जरिए सीधे ग्रीन कार्ड यानी स्थायी निवास का रास्ता भी खुल सकता है। खास बात यह है कि नर्सिंग “Schedule A” कैटेगरी में आती है, इसलिए इस प्रोसेस में कुछ अतिरिक्त स्टेप्स की जरूरत नहीं पड़ती।
अब सवाल यह भी है कि भारत की नर्सें अमेरिका क्यों जाना चाहती हैं? इसका जवाब साफ है—बेहतर सैलरी, बेहतर वर्किंग कंडीशन और करियर ग्रोथ। अमेरिका में एक रजिस्टर्ड नर्स की सालाना सैलरी भारतीय रुपये में लाखों से करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि भारत में शुरुआती स्तर पर वेतन अपेक्षाकृत कम होता है। इसके अलावा वहां काम के घंटे, सुविधाएं और प्रोफेशनल माहौल भी काफी बेहतर माना जाता है।
इस प्रोसेस में समय, पैसा और धैर्य—तीनों की जरूरत होती है। कई बार पूरी प्रक्रिया में 1 से 3 साल तक का समय लग सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप पहले से तैयारी करें, सही जानकारी लें और किसी भी एजेंट या गलत वादों से बचें। अगर आपने भारत में BSc नर्सिंग की है और मेहनत करने के लिए तैयार हैं, तो अमेरिका में करियर बनाना कोई दूर की बात नहीं है। सही दिशा, सही तैयारी और धैर्य के साथ आप भी विदेश में एक सफल नर्स के तौर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।




