[the_ad id="179"]
Home » National » तानाशाह का डर: दिल्ली प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई, छात्रों और CJP समर्थकों को नोटिस

तानाशाह का डर: दिल्ली प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई, छात्रों और CJP समर्थकों को नोटिस

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 अक्टूबर 2026

दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई ने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस ने छात्रों और CJP समर्थकों को नोटिस भेजे हैं। कई लोगों को फोन कर दिल्ली नहीं जाने की हिदायत दी गई है, जबकि कुछ से राजधानी जाने की योजना और यात्रा से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। प्रदर्शन से ठीक पहले सामने आई इन कार्रवाइयों ने सवाल खड़ा किया है कि क्या सरकार और प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध की आवाज से असहज हैं?

यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। CJP और उससे जुड़े संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, ठाणे में रहने वाले एक हाइड्रोलिक मैकेनिक को 8 अक्टूबर को पुलिस ने नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के CJP प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और पुलिस को गोपनीय सूचना मिली है कि संबंधित व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है। महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक कृष्णा कोकानी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 168 के तहत आदेश देते हुए संबंधित व्यक्ति और उसके सहयोगियों को ऐसा कोई काम नहीं करने को कहा, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो।

लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि किसी प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका के आधार पर ही लोगों को नोटिस भेजना और उनकी यात्रा को लेकर पूछताछ करना कहां तक उचित है? क्या किसी नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध में शामिल होने की योजना बनाने के कारण ही संदेह के घेरे में रखा जाना चाहिए? पुलिस का पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित गड़बड़ी रोकने का है, लेकिन नोटिस जारी होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि संबंधित व्यक्ति किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने वाला था।

दिल्ली पुलिस पहले ही जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर चुकी है। ऐसे में महाराष्ट्र में भी छात्रों और समर्थकों को नोटिस दिए जाने की खबर ने विरोध के अधिकार और प्रशासनिक प्रतिबंधों को लेकर बहस तेज कर दी है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच हो और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका पर जवाबदेही तय की जाए।

लोकतंत्र में सरकार और निर्वाचन संस्थाओं से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इस जिम्मेदारी के नाम पर नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध और स्वतंत्र आवाजाही के अधिकार पर अनावश्यक रोक नहीं लगनी चाहिए।

प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई ने एक बुनियादी सवाल सामने ला दिया है—लोकतंत्र में असहमति को सुना जाएगा या उसे रोकने के लिए पहले ही कदम उठाए जाएंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *